विराटनगर से भामोद और लू लगने से अस्वस्थता


3-5 जून 2023

तीन जून को सवेरे आठ बजे के आसपास श्री अम्बिका शक्तिपीठ दर्शन के बाद विराटनगर से निकले। अगला मुकाम है पुष्कर का मणिबंध शक्तिपीठ। विराटनगर से 221 किमी दूर है पैदल मार्ग से। गर्मी ज्यादा तेज हो गयी है। एक दिन में औसत पच्चीस किलोमीटर ही चला जा सकता है। वह भी तब जब सवेरे भोर में निकला जाये और दस इग्यारह बजे किसी सही जगह पर दोपहर काटी जाये। शाम को फिर चार बजे से सात आठ बजे तक चला जाये। इस हिसाब से आठ-नौ दिन की यात्रा है पुष्कर तक की।

तीन जून को थोड़ा देरी से निकले थे तो ज्यादा नहीं चल पाये। दोपहर में भामोद नाम की एक ग्रामीण जगह में एक चाय की दुकान पर प्रेमसागर रोटी-दाल-सब्जी के भोजन की तलाश कर रहे थे।

भामोद में रामेश्वर जी के घर। भरापूरा परिवार है रामेश्वर जी का।

मुझे बताया – “बहुत भूख लगी थी भईया। पर दुकान वाले ने कहा कि उसके यहां तो चाय-समोसा ही मिलता है। आसपास भी कोई भोजनालय नहीं है। यह बात कोई सज्जन सुन रहे थे। वे उठ कर गये और बगल की दुकान पर बताया कि कोई साधू-पदयात्री भोजन की तलाश कर रहा है। तो भईया, ये रामेश्वर जी बात सुने और मेरे पास आ कर मुझे अपने घर ले आये। घर पर आदर से भोजन कराया। उन्ही के यहां फिर दो घण्टा सो भी गया मैं। जब चलने लगा तो रामेश्वर जी ने कहा कहा कि गर्मी बहुत है। आज यहीं रुक जायें। कल सवेरे निकल लीजियेगा। … भईया आज यहीं रुक रहा हूं। जगह का नाम है भामोद।”

मैंने नक्शे में भामोद नाम की जगह तलाशी। पंद्रह किलोमीटर चले होंगे प्रेमसागर। पर शायद विराटनगर और शक्तिपीठ के बीच घूमे होंगे तो कुल पैदल 24 किमी हुआ। इतनी दूरी तय करना कम नहीं है एक गर्मी के दिन में।

लेकिन अजीब पदयात्री है यह! भोजन का हिसाब नहीं। सवेरे आठ बजे निकलते समय विराटनगर में भोजन कर लेना चाहिये था। पैसे बचाने के फेर में पड़ा है क्या? पैसे पास में हैं भी या नहीं? वैसे अन्य जगहों की तुलना में राजस्थान में आतिथ्य-सत्कार तो बेहतर ही हो रहा है प्रेमसागर का। शायद लापरवाही है या अपने आप पर ज्यादा ही यकीन है।

रामेश्वर जी भले मानस हैं। चित्र में उनका भरापूरा परिवार दीखता है। लड़का सरकारी स्कूल में अध्यापक है। अच्छा हुआ उन्हें प्रेमसागर मिल गये और उन्हें अपने घर पर रोक लिया।

रात में प्रेमसागर की तबियत खराब हो गयी।

रात में प्रेमसागर की तबियत खराब हो गयी। “बुखार तेज हो गया भईया। ऐसा लगता था कि पूरा बदन टूट रहा है। रामेश्वर जी के घर वालों ने आम को उबाल कर उसके रस से शरीर में लेप किया। सवेरे कुछ बेहतर लगा।”

सवेरे आगे की यात्रा पर रामेश्वर जी के घर से निकल तो लिये प्रेमसागर पर तीन किलोमीटर बमुश्किल चल पाये। मुझे फोन पर बताया – “चला नहीं गया भईया। रामेश्वर जी के यहां से लोग आ रहे हैं। वे एक डाक्टर साहब को जानते हैं। उन्हें दिखाऊंगा और अभी आगे चला नहीं जायेगा। फरीदाबाद लौट कर एक सप्ताह आराम कर फिर आऊंगा यात्रा करने। तब तक शायद गर्मी भी कम हो जाये।”

रामेश्वर जी के साथ प्रेमसागर। साथ में बच्चे।

उसके बाद प्रेमसागर से बात नहीं हुई। गूगल मैप पर मैं देखता रहा कि वे वापस यात्रा कर रहे हैं। मार्ग रेल लाइन का नहीं दिखता था। फिर वे आगरा में दिखे। मुझे लगा कि वहां से वे फरीदाबाद जायेंगे। पर यात्रा आगे जारी रही। गूगल मैप की एक सैम्पलिंग में मैंने उन्हें इटावा-सैफई के समीप देखा।

चार जून को दिन भर चलना हुआ। पांच जून को सवेरे बस्ती से गोरखपुर और देवरिया होते आगे बढ़ना देखा। प्रेमसागर ने पहले बताया था कि उनका पैत्रिक घर देवरिया है। शायद देवरिया जाना हो। पर तब दिन में इग्यारह बजे फोन आया। वे सलेमपुर से गुजर रहे थे। कार में यात्रा करते। बताया कि भामोद में डाक्टर साहब ने बताया था कि लू लग गयी है। रामेश्वर जी ने आगरा की बस में बिठा दिया था। “मैने सोचा आगरा से फरीदाबाद जाऊंगा भाई या बहन के यहां पर वहां बात की तो वे सब बड़ी बहन के यहां शादी में जीरादेई (सिवान के पास) जा रहे थे। उनके साथ मैंने भी यात्रा की। अब जीरादेई में दस दिन आराम करना होगा।”

लू लगने से बुखार में तपता आदमी 925 किमी की यात्रा करे बस और कार में! मेरे ख्याल से निहायत पागलपन है। पर पूरा भारत भ्रमण बिना संसाधन, महादेव के सहारे, पैदल करने वाला उन्हीं के गण जैसा ही तो होगा!

मौज करें प्रेमसागर। अब कभी मुझे सम्पर्क करेंगे, तब देखा जायेगा। उनकी शक्तिपीठ यात्रा के कुछ दिन के पैच – कुरुक्षेत्र से अम्बाला और अम्बाला से जालंधर की यात्रा का खण्ड लिखा नहीं गया है। वह 500-700 शब्द प्रतिदिन के हिसाब से लिख कर यह ट्रेवलॉग पूरा कर लूंगा। तब तक बारिश का मौसम भी आ जायेगा। मानसून इस बार देर से आ रहा है। हफ्ता भर देर से तो हो ही गया है। मानसून के चौमासे में प्रेमसागर यात्रा करेंगे या नहीं, वे जानें। मेरी पत्नीजी का कहना है कि और भी बहुत विषय हैं जिनपर लिखा कहा जा सकता है। मैं उनका अध्ययन करूंगा।

प्रेमसागर की यात्रा का यह प्रकरण लू लगने के बाद 1000किमी की बस-कार यात्रा से सम्पन्न होता है। ॐ मात्रे नम:! हर हर महादेव!

प्रेमसागर की शक्तिपीठ पदयात्रा
प्रकाशित पोस्टों की सूची और लिंक के लिये पेज – शक्तिपीठ पदयात्रा देखें।
*****
प्रेमसागर के लिये यात्रा सहयोग करने हेतु उनका यूपीआई एड्रेस – prem12shiv@sbi
दिन – 103
कुल किलोमीटर – 3121
मैहर। प्रयागराज। विंध्याचल। वाराणसी। देवघर। नंदिकेश्वरी शक्तिपीठ। दक्षिणेश्वर-कोलकाता। विभाषा (तामलुक)। सुल्तानगंज। नवगछिया। अमरदीप जी के घर। पूर्णिया। अलीगंज। भगबती। फुलबारी। जलपाईगुड़ी। कोकराझार। जोगीघोपा। गुवाहाटी। भगबती। दूसरा चरण – सहारनपुर से यमुना नगर। बापा। कुरुक्षेत्र। जालंधर। होशियारपुर। चिंतपूर्णी। ज्वाला जी। बज्रेश्वरी देवी, कांगड़ा। तीसरा चरण – वृन्दावन। डीग। बृजनगर। विराट नगर के आगे। श्री अम्बिका शक्तिपीठ। भामोद। यात्रा विराम। मामटोरीखुर्द। चोमू। फुलेरा। साम्भर किनारे। पुष्कर। प्रयाग। लोहगरा। छिवलहा। राम कोल।
शक्तिपीठ पदयात्रा

श्री अम्बिका शक्तिपीठ, विराटनगर


03 जून 2023

गीताप्रेस की “शक्तिपीठ दर्शन” में एक पैराग्राफ है – जयपुर के 64किमी उत्तर में महाभारतकालीन विराटनगर के पुराने खण्डहर हैं … यहीं पर विराट ग्राम में शक्तिपीठ है। यहां देवी के दांये पैर की उंगलियां गिरी थीं। यहां की शक्ति “अम्बिका” और भैरव “अमृत” हैं।

यह शक्तिपीठ एक पहाड़ी पर है। सीढ़ियां बनी हैं वहां जाने के लिये पर बहुत ज्यादा नहीं चढ़ना पड़ता। भोर में ही पंचवटी आश्रम के हनुमान मंदिर, जहां प्रेमसागर रुके थे, से निकल कर ढाई किलोमीटर चल कर शक्तिपीठ तक पंहुचे। रास्ता भी सीधा सीधा नहीं है। जंगल सा है। पूछते हुये गये।

श्री अम्बिका शक्तिपीठ की सीढ़ियां

मंदिर के पास कुछ सवेरे पूजा अर्चना करने आई महिलायें भर हैं। उन्होने ही बताया कि पुजारी जी तो आठ बजे तक आते हैं। मंदिर खुला ही रहता है। प्रेमसागर ने खुद ही घण्टी बजाई, ध्यान किया और दर्शन कर बाहर निकले। “भईया, मंदिल छोटा ही है। शक्तिपीठ का बोर्ड जरूर लगा है। माता की आंखें बड़ी सुंदर हैं। लगता है कुछ बोल रही हैं। अकेले वहां अच्छा लगा पर भईया हमको यह समझ नहीं आता कि वह पुजारी कैसे हैं जो ब्रह्म मुहूर्त में उठ कर देवी देवता की अर्चना नहीं करते? उस पुजारी से ज्यादा अच्छी तो वे औरतें हैं जो सवेरे सवेरे वहां आई थीं।”

मंदिर के पास कुछ सवेरे पूजा अर्चना करने आई महिलायें भर हैं। उन्होने ही बताया कि पुजारी जी तो आठ बजे तक आते हैं। मंदिर खुला ही रहता है।

अरावली की पहाड़ियों से झांकता सवेरे का सूरज – बहुत मोहक दृश्य है और प्रेमसागर ने अपने मोबाइल के साधारण कैमरे से खींचा भी अच्छे से है। चित्र में बिजली के खम्भे और तार जरूर आ गये हैं, पर उनको दरकिनार कर दिया जाये तो सब कुछ वैसा ही है जैसा महाभारतकाल में अज्ञातवास झेलते पाण्डवों ने देखा होगा।

अरावली की पहाड़ियों से झांकता सवेरे का सूरज – बहुत मोहक दृश्य है

“यहां से भईया पंचवटी जा कर अपना सामान उठाऊंगा और चल दूंगा जयपुर की तरफ। थोड़ा लेट निकलना होगा। आज गर्मी भी ज्यादा होगी, ऐसा लगता है। देखें कितना दूर चलना हो पाता है। पुष्कर में शक्तिपीठ दर्शन कर हफ्ता भर आराम करूंगा और फिर निकलना होगा गुजरात। या फिर मध्यप्रदेश के अमरकण्टक। इन जगहों पर पहले जा चुका हूं तो चलना कम पड़ेगा। अमरकण्टक, जबलपुर, उज्जैन और फिर गुजरात। … ” प्रेमसागर आगे की सोचने लगते हैं।

श्री अम्बिका शक्तिपीठ

“भईया एक बात हमको समझ नहीं आता। मध्यप्रदेश में भी जगह देखा। उसको भी विराट नगर कहा जाता है। वहां भी पाण्डवों के रहने के परमान हैं। लोग जनकपुर में भी विराटनगर की बात करते हैं। यहां बहुत ज्यादा बताने वाले नहीं मिले। लोग कहते हैं कि आज आगे वह जगह मिलेगा जहां हनुमान जी भीम के सामने पूंछ रास्ते में रख कर लेटे मिले थे और दोनो में लड़ाई में भीम हो पटक दिये थे। पर भईया विराट नगर के इतने दावेदार हैं कि हम कंफ्यूज हो जाते हैं।” प्रेमसागर ने अपनी शंका व्यक्त की। कायदे से यह शंका उन्हें अपने आध्यात्मिक प्राइम मूवर्स के सामने रखनी जी, जिनकी प्रेरणा से वे यात्रा पर निकले हैं। पर जब मुझसे पूछा तो मैंने चैट जीपीटी को उत्तर देने के लिये पकड़ा।

मैंने उससे पूछा – Where is Virat kingdom of Mahabharat era. I understand many places claim to be the real Virat Nagar. Which is most authentic.

उसने उत्तर में कई स्थान बताये। उसको मैंने दिये उत्तर का हिंदी अनुवाद करने को भी कहा।

सो, विराट नगर के दावेदार बहुत हैं। चित्तौड़गढ़, हनुमानगढ़, बठिंडा, झुंझनू, होशियारपुर, दंतेवाड़ा, चण्डीगढ़, हरियाणा — अनेक स्थल। पर चैटजीपीटी के अनुसार सबसे सम्भावित दावेदारी बैरठ या विराट नगर की है। वह स्थान जहां प्रेमसागर अभी खड़े थे!

चैटजीपीटी का चैट एक मुद्दे को तो फ्लैग करता है। भारत में पुरातत्व को ले कर बहुत काम है जो किया जाना है। इसकी ओर विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों और आर्कियॉलॉजिकल सर्वे को काम करने का न तो पर्याप्त मोटीवेशन है और न संसाधन। और तथाकथित हिंदू गौरव की सरकार तो इस दिशा में रत्ती भर भी नहीं कर रही। उसका एक ही काम है – चुनाव दर चुनाव जीतना! :sad:

इस शक्तिपीठ स्थल की दावेदारी का कोई और स्थान मुझे नहीं मिला। कई अन्य स्रोत तो इस शक्तिपीठ को सूची में डालते भी नहीं। मसलन अलका पाण्डे की पुस्तक ‘शक्ति’ में तो राजस्थान का कोई शक्तिपीठ वर्णित ही नहीं है।

चैटजीपीटी का चैट एक मुद्दे को तो फ्लैग करता है। भारत में पुरातत्व को ले कर बहुत काम है जो किया जाना है। इसकी ओर विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों और आर्कियॉलॉजिकल सर्वे को काम करने का न तो पर्याप्त मोटीवेशन है और न संसाधन। और तथाकथित हिंदू गौरव की सरकार तो इस दिशा में रत्ती भर भी नहीं कर रही। उसका एक ही काम है – चुनाव दर चुनाव जीतना! :sad:

पर मुझे अच्छा लगा कि इस मनोरम, एकांत और छोटे स्थान की यात्रा प्रेमसागर ने की। मेरे ख्याल से देवी (या देवता) ऐसे निर्जन स्थलों पर ही रहते हैं जहां मानव ने उनका कमर्शियल दोहन नहीं किया है।

शक्तिपीठों में अगर किसी एक जगह मुझे जाने को कहा जाये तो मैं कामाख्या, मंगला गौरी, विशालाक्षी, छिन्नमस्ता … इनके दर्शन की बजाय बैरठ के इस मंदिर में आना पसंद करूंगा। ॐ मात्रे नम:!

श्री अम्बिका शक्तिपीठ से पहाड़ियों का मनोरम दृश्य

हर हर हर हर महादेव। यहां भैरव ‘अमृत’ हैं। भगवान हमें अमृतत्व प्रदान करें!

प्रेमसागर की शक्तिपीठ पदयात्रा
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प्रेमसागर के लिये यात्रा सहयोग करने हेतु उनका यूपीआई एड्रेस – prem12shiv@sbi
दिन – 103
कुल किलोमीटर – 3121
मैहर। प्रयागराज। विंध्याचल। वाराणसी। देवघर। नंदिकेश्वरी शक्तिपीठ। दक्षिणेश्वर-कोलकाता। विभाषा (तामलुक)। सुल्तानगंज। नवगछिया। अमरदीप जी के घर। पूर्णिया। अलीगंज। भगबती। फुलबारी। जलपाईगुड़ी। कोकराझार। जोगीघोपा। गुवाहाटी। भगबती। दूसरा चरण – सहारनपुर से यमुना नगर। बापा। कुरुक्षेत्र। जालंधर। होशियारपुर। चिंतपूर्णी। ज्वाला जी। बज्रेश्वरी देवी, कांगड़ा। तीसरा चरण – वृन्दावन। डीग। बृजनगर। विराट नगर के आगे। श्री अम्बिका शक्तिपीठ। भामोद। यात्रा विराम। मामटोरीखुर्द। चोमू। फुलेरा। साम्भर किनारे। पुष्कर। प्रयाग। लोहगरा। छिवलहा। राम कोल।
शक्तिपीठ पदयात्रा

सरिस्का से बैराट, विराटनगर


2 जून 2023

बाबा प्रेमदास के मिष्टान्न भण्डार में रात गुजारने के बाद अगले दिन (2 जून को) प्रेमसागर आगे रवाना हुये। वे सरिस्का बाघ अभयारण्य से गुजर रहे थे। सड़क बफर जोन और अभयारण्य की सीमा से गुजरती है। मिष्टान भण्डार के मालिक जी से उन्हें सलाह दी कि भोर में न निकलें। कुछ समय गुजर जाने दें। सड़क पर थोड़ी चहल पहल हो जाये तभी जाना ठीक होगा। उन्हें रास्ते के लिये एक लाठी भी दे दी। अन्यथा, कम सामान ले कर चलने के हिसाब से प्रेमसागर एक स्लिंग बैग भर ले कर यात्रा कर रहे थे। यह यात्रा उनकी कांवर यात्रा से बिल्कुल अलग है। उस यात्रा में तो कांवर और पोटली आदि मिला कर कांधे पर तीस किलो का वजन हुआ करता था।

सफारी का बुकिंग ऑफिस और जीप

एक स्थान पर अभयारण्य सफारी का बुकिंग ऑफिस मिला। एक जीप खड़ी थी। उसमें प्रति व्यक्ति 1200रुपये के हिसाब से बुकिंग हो रही थी। jजीप में छ सैलानी आते हैं। उन्हें दोपहर तीन बजे से शाम सात बजे तक यह जीप अभयारण्य में लोगों को घुमाने के बाद इसी स्थान पर वापस ला कर छोड़ती है। जीप वाला बोल रहा था कि उसको इस सफारी से प्रति व्यक्ति तीन सौ मिलते हैं। बाकी सरकार (वन विभाग?) लेती है।

एक वेब साइट पर मुझे सफारी का रेट 800रुपये दिखा। हो सकता है कि साइट अपडेट न की गयी हो। या यह भी हो सकता है कि जीप वाला चार सौ रुपया ज्यादा झटक रहा हो। फिलहाल प्रेमसागर को सफारी भ्रमण नहीं, शक्तिपीठ की यात्रा करनी थी। वे आगे बढ़े।

एक जगह एक भले सज्जन कौव्वों और मछलियों को रोटी और कबूतरों को दाना खिलाते मिले।

वन्य क्षेत्र मोहक था। एक जगह एक भले सज्जन कौव्वों और मछलियों को रोटी और कबूतरों को दाना खिलाते मिले। “लोग बड़े भले हैं इस इलाके में भईया।”

कुछ छोटे जानवर उन्हें रास्ते में मिले। एक जगह जंगली सूअर भी दिखा। लगा कि वह हमला कर सकता है, पर यह भी लगा कि अगर हमला करेगा तो पास में लाठी है। दो चार लाठी तो जमा ही सकते हैं। “भईया इतनी यात्रा का एक बदलाव तो है। अब भय उतना नहीं लगता। पहले जंगल और पानी में अकेले नहीं हिल सकता था। अब जाने में कोई दिक्कत नहीं होती। शक्तिपीठ यात्रा का यह प्रभाव तो हुआ है।”

“यहां हर बड़ी मिठाई की दुकान पर मावा स्टीम से बनता है।”

“मैने आपको एक मशीन के फोटो भेजे हैं। यहां हर बड़ी मिठाई की दुकान पर मावा स्टीम से बनता है। एक जगह भाप बनाई जाती है। वह पाइप से तीन कड़ाहों पर जाती है। दूध गरम होता है और तीसरे कड़ाहे में वह मावा बनता है।” – प्रेमसागर ने बताया। मुझे इस मशीन के बारे में नहीं पता था। नेट पर देखा तो ज्यादा मंहगी नहीं है चालीस-पचास हजार की है। हाथ से पल्टा चला कर खोआ बनाने की जरूरत नहीं होती। खोआ जलने की सम्भावना भी नहीं होती। प्रेमसागर की पदयात्रा का लाभ हुआ कि ऐसी मशीन का पता चला।

चाक गोरवारी में। यहां करन अर्जुन की शूटिंग हुई थी। बकौल प्रेमसागर – “जो दाये साइड में भैया हैं वो दुकानदार बलविंदर सिंह का
किराएदार निभाए थे”

शाम के समय, विराट नगर के कुछ पहले एक गांव – चाक गोरवारी (प्रेमसागर चाक गौदावरी लिखते हैं, पर मैं स्थानों के नामों के बारे में उनकी बजाय गूगल को ज्यादा सही मानता हूं) – में कोई फिल्म करन-अर्जुन की शूटिंग हुई थी, ऐसा प्रेमसागर को पता चला। जिस दुकान में शूटिंग हुई थी, वह देखी। जिस सज्जन ने कोई “बलविंदर सिंह” का रोल अदा किया था, वे सज्जन भी मिले। “चित्र में दांये साइड जो भईया हैं, वे बलविंदर सिंह का किरायेदार अदा किये” – प्रेमसागर ने अपनी भाषा में भेजे गये चित्र के साथ लिखा। अब चित्र में प्रेमसागर के साथ तीन व्यक्ति हैं। कौन किरदार अदा करने वाले हैं – वह मुझे स्पष्ट नहीं होता। वह जानने के लिये मैंने पूछा भी नहीं। फिल्म में दिलचस्पी नहीं मुझे! :-)

शाम सात आठ बजे पंहुचे होंगे प्रेमसागर विराट नगर। वहां पंचवटी में हनुमान मंदिर में उन्हें रहने को जगह मिली। श्री अम्बिका शक्तिपीठ वहां से ढाई किलोमीटर आगे पहाड़ी पर है। मंदिर चौबीस घण्टे खुला रहता है पर रास्ता जंगली और सुनसान है। पंचवटी के हनुमान मंदिर वालों ने सलाह दी कि वे रात में दर्शन करने की बजाय अगले दिन सवेरे दर्शन करने जायें।

पंचवटी में सीतेश मिश्र के साथ प्रेमसागर

रात हनुमान मंदिर में गुजारी प्रेमसागर ने। मंदिर के प्रबंधक-पुजारी हैं सीतेश मिश्र जी। एक बालक प्रेमसागर के लिये भोजन बनवा कर लाया अपने घर से। महेश सैनी जी उसके बाबा हैं।

पदयात्रा में कोई करन-अर्जुन के किरदार, कोई सीतेश मिश्र, कोई महेश सैनी जी, कोई बाबा प्रेमदास मिल जाते हैं प्रेमसागर को। जहां यात्रा में सहायता स्नेह मिलता है, वहां यात्रा सुखद होती है। वहां मंदिरों में भगवान होते हैं। जहां नहीं होता, वहां कुड़बुड़ाहट व्यक्त करते हैं प्रेमसागर। पर यात्रा की प्रकृति पर उन सब से फर्क नहीं पड़ता। अगला दिन होता है और प्रेमसागर आगे की यात्रा पर निकल लेते हैं।

[यह लेखन तीन दिन के समयांतराल के बाद है। इस बीच प्रेमसागर अस्वस्थ हो चुके हैं और यात्रा बीच में रोक कर लौट गये हैं। अभी सलेमपुर से गुजर रहे हैं। बड़ी बहन जीरादेई रहती हैं। सिवान के पास। जीरादेई बाबू राजेंद्रप्रसाद का पैत्रिक स्थान है। … अजब गजब है यह पदयात्री! लू लगने पर एक हजार किमी की बस और कार से यात्रा कर घर जा रहा है कि वहां हफ्ता भर आराम कर फिर निकलेगा!

प्रेमसागर की लोकेशन, सलेमपुर, देवरिया के आगे।

खैर, इस दौरान प्रेमसागर की पदयात्रा के एक सप्ताह के पैचेज बाकी हैं। जिन्हे टुकड़े टुकड़े में रोज लिखने का प्रयास करूंगा।]

हर हर महादेव! ॐ मात्रे नम:।

प्रेमसागर की शक्तिपीठ पदयात्रा
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प्रेमसागर के लिये यात्रा सहयोग करने हेतु उनका यूपीआई एड्रेस – prem12shiv@sbi
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मैहर। प्रयागराज। विंध्याचल। वाराणसी। देवघर। नंदिकेश्वरी शक्तिपीठ। दक्षिणेश्वर-कोलकाता। विभाषा (तामलुक)। सुल्तानगंज। नवगछिया। अमरदीप जी के घर। पूर्णिया। अलीगंज। भगबती। फुलबारी। जलपाईगुड़ी। कोकराझार। जोगीघोपा। गुवाहाटी। भगबती। दूसरा चरण – सहारनपुर से यमुना नगर। बापा। कुरुक्षेत्र। जालंधर। होशियारपुर। चिंतपूर्णी। ज्वाला जी। बज्रेश्वरी देवी, कांगड़ा। तीसरा चरण – वृन्दावन। डीग। बृजनगर। विराट नगर के आगे। श्री अम्बिका शक्तिपीठ। भामोद। यात्रा विराम। मामटोरीखुर्द। चोमू। फुलेरा। साम्भर किनारे। पुष्कर। प्रयाग। लोहगरा। छिवलहा। राम कोल।
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