कोरोना और किराना


कोरोना का काल हमें कोहनिया रहा है कि हम गांव वाले बनें। किराना के सामान के प्रकार और गुणवत्ता को ले कर व्यक्तित्व में जो अफ़सरी तुनक बाकी रह गयी है (रिटायरमेण्ट के चार साल बाद भी) वह खतम होनी चाहिये। चॉकलेट की बजाय गुड़ की भेली और नूडल्स की बजाय देसी सेंवई पर सन्तोष करना चाहिये।

भाग, करोना भाग!


नौ बजे, पास के बस्ती के कुछ बच्चे जोर जोर से “भाग, करोना भाग!” का सामुहिक नारा भी बार बार लगा रहे थे। … कुल मिला कर पूरे देश के एक साथ होने का भाव गहरे में महसूस हो रहा था।

पिछले सप्ताह के मेरे कोविड19 विषयक ट्वीट्स


भविष्य की ट्वीट्स इसी तरह ब्लॉग पर लम्बे समय के लिये रखने और बाद में सर्च करने की सहूलियत के लिये संजोता रहूंगा।

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