एक रिटायर्ड अधिकारी का साइकिलवाद


रेलवे में नौकरी के दिनों की एक छोटी-सी आदत थी, जो तब सामान्य लगती थी। प्रयागराज या गोरखपुर के रेलवे जोनल मुख्यालय में एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर तक पैदल जाया जा सकता था, पर पैदल अकेले नहीं। साथ में चपरासी चलता था, फाइलें उठाए। बिल्डिंग के बाहर ड्राइवर कार लगाए खड़ा रहता था। वहContinue reading “एक रिटायर्ड अधिकारी का साइकिलवाद”

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