इस उम्र में पहली समझ यह बनती है कि संख्या से लड़ना व्यर्थ है। “जम्हूरियत इक तर्ज़-ए-हुकूमत है कि जिसमें,बंदों को गिना करते हैं, तोला नहीं करते।” — इकबाल की नज़्म का हिस्सा। भारत में अपीज़मेंट—तुष्टिकरण—की राजनीति है।कभी “ब्राह्मण भारत छोड़ो” जैसे नारे सुनाई देते हैं।जहाँ उम्मीद होनी चाहिए, वहाँ मायूसी है।शिक्षा लचर है; न्यायपालिकाContinue reading “सत्तर साल के जीडी को क्या करना चाहिए”
