वनतुलसी की गंध, बांस का पुल, बघेरे की आहट और गेंहुअन का भय


नीलकंठ की आर्मचेयर नर्मदा परिक्रमा दिन 2 सवेरे आंख खुली तो सब कुछ चुप था। रात की जद्दोदहद याद आई। रात में बांई ओर नर्मदा की धारा थी, और दाहिने – मच्छरों का मोर्चा। टॉर्च की रौशनी में ओडोमॉस की ट्यूब निकाल मैने उसे सारे खुले अंगों पर मला था। तब जब मच्छरों ने युद्धविरामContinue reading “वनतुलसी की गंध, बांस का पुल, बघेरे की आहट और गेंहुअन का भय”

आर्मचेयर परिक्रमा – डिंडोरी से कंधूजी शिव मंदिर


आर्मचेयर परिक्रमा – दिन 1 नीलकंठ चिंतामणि की कलम से नीलकंठ का ईमेल सवेरे ठीक छह बजे आया। लगता है, यह उसने रात को अंतिम स्पर्श देकर सवेरे भेजा था..यह वही नीलकंठ है, जो हमारे बैच का सबसे बड़ा लिक्खाड़ था। ट्रेनिंग के दौरान एक बार कोलफील्ड के थाने में एफआईआर दर्ज करानी पड़ी —Continue reading “आर्मचेयर परिक्रमा – डिंडोरी से कंधूजी शिव मंदिर”

आर्मचेयर नर्मदा परिक्रमा की प्रस्तावना


नीलकंठ और सुदामा की पहली बैठक (डिंडौरी से बरगी तक की यात्रा की भूमिका) प्रेमसागर ने डिंडौरी से पैदल चलकर चाबी गाँव में जब नर्मदा परिक्रमा को खंड-विराम दिया, तब वे सड़क मार्ग से ही चल रहे थे। डिंडौरी और जबलपुर के बीच, नर्मदा के उत्तर या दक्षिण तट की पदयात्रा अधिकांश यात्री सड़क केContinue reading “आर्मचेयर नर्मदा परिक्रमा की प्रस्तावना”

Create your own website, free on WordPress.com.Create your own website.
Start free