बरियापुर में मंहगू नाई 


गांवदेहात डायरी बाल बढ़ गये थे। साइकिल चलाते देख नंदलाल ने दूर से ही पैलगी उछाली — पालागी गुरू जी। अब तो आपके बाल आइन्स्टीन  कट लग रहे हैं।  मुझे भी लगा कि तेल-फुलेल-कंघी से दूरी रखने और नाई को नियमित न बुलाने के कारण मेरी शक्ल वैसी हुई होगी, वर्ना आइन्स्टीन  जैसा बौद्धिक व्यक्तित्वContinue reading “बरियापुर में मंहगू नाई “

आदर्श चीफ ट्रेन कंट्रोलर गोस्वामी जी


नीलकंठ बरियापुर के रिटायरमेंट होम में तैयार हो कर सैर पर निकलने जा रहा है। वह जूते—स्पोर्ट्स शू—पहन रहा था। झुकते ही कमर में हल्का दर्द उठा। सत्तर साल की उम्र में कभी इधर, कभी उधर दर्द होना अब रूटीन है। उससे क्या शिकायत?शरीर अपनी उम्र याद दिलाता रहता है, पर मन अपनी नहीं मानता।Continue reading “आदर्श चीफ ट्रेन कंट्रोलर गोस्वामी जी”

बरियापुर और नीलकंठ की रचना क्यों?


>>> बरियापुर और नीलकंठ की रचना क्यों? <<< बहुत से लेखकों ने अपनी रचनाधर्मिता के लिये पात्र और स्थान रचे हैं। आर के नारायण ने मालगुड़ी की रचना की। मालगुड़ी बंगलोर के दो स्थानों मल्लेश्वरम और बसवानगुड़ी का फ्यूज़न है। मालगुड़ी बनाया और साथ में ढेरों पात्र आये। उन सब के माध्यम से आर केContinue reading “बरियापुर और नीलकंठ की रचना क्यों?”

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