कांवरयात्रा – गंगोत्री से रुद्रप्रयाग और आगे


“महादेव तो सतत आपके साथ हैं। तभी तो इतनी लम्बी यात्रा कर पाये हैं!”
“सो तो है भईया। पर इतनी लम्बी यात्रा में कभी कभी बीच में हिम्मत डोल जाती है। आप जैसे लोग ही सहारा देते हैं। कभी कभी तो चाय के लिये भी पैसा नहीं रहता।”

प्रेमसागर – गंगोत्री से गोमुख और वापस


“बन वाले हमको अकेले जाने की परमीशन नहीं दिये। बोले – बाबा लोग का भरोसा नहीं। क्या पता कौन बाबा किस गुफा में आसन जमा ले। एक बार बैठ जाने पर उस बाबा को वहां से निकालना मुश्किल होता है।” – प्रेमसागर ने बताया।

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