वंजारा कहते हैं – रणभेरी बज चुकी है


गुजरात में पुलीस के अधिकारी एक व्यक्ति और उसकी पत्नी के छ्द्म-एनकाउंटर के मामले में पकड़ लिये गये हैं. उनमें से प्रमुख, डीजी वंजारा ने कहा है बैटल लाइंस आर ड्रान. बैटल लाइन वास्तव में खिंच गयी है.

पुलीस, राजनेता, अपराधी, मीडिया और आम जनता इस रणभेरी में सभी गड्ड-मड्ड हैं. यह केवल सादी सी निरीह नागरिक और निर्दय पुलीस की कथा नहीं है. आखिर सोहराबुद्दीन कई मामलों में लिप्त अपराधी था, जिसकी तलाश की जा रही थी. और इसपर चर्चा भी ब्लैक एण्ड ह्वाइट चरित्रों को लेकर नहीं होगी. यह एक जटिल विषय का हिस्सा है और इसपर परिदृष्य भी जटिल ही बनेगा भविष्य में.

मुझे तो पूर्वांचल दिखता है. सिवान, गाजीपुर, मऊ, बनारस, इलाहाबाद, गोरखपुर, आजमगढ़ … सब जगह माफियागिरी और दबंगई का आलम है. इन तत्वों के खिलाफ कानूनी लड़ाई जीतना सम्भव प्रतीत नहीं होता. कानून में जो गवाही और अंतिम सीमा तक अकाट्य प्रमाण के तत्व मौजूद हैं, उनका पूरे संज्ञान में पैसे व लाठी की ताकत वाले अपने पक्ष में दुरुपयोग करते हैं. न्याय या तो मिल नहीं पाता या फिर उसमें अत्यंत देरी होती है. कानून को कानून के नियमों का (दुरु)प्रयोग कर ये तत्व अंगूठा दिखाते रहते हैं. यही कारण है कि एनकाउण्टर (या फेक-एनकाउण्टर) इस प्रकार के तत्वों से निपटने का सरल और वैकल्पिक माध्यम बन जाते हैं. फिर एनकाउण्टर का दुरुपयोग भी चल निकलता है.

आतंकवादी/नक्सली/रंगदारी/अपहरणकर्ताओं और माफिया से इण्डियन पीनल कोड या क्रिमिनल प्रोसिडियर कोड के बल पर निपटा जा सकना सन्दिग्ध है. क्या आप मानते हैं कि पंजाब में शांति इन कानूनों के बल पर आई थी? इन कानूनों को सुधारने का महत्वपूर्ण काम होना चाहिये. एनकाउण्टर पर, धर्म और राजनीति के निरपेक्ष, एक सुस्पष्ट सोच विकसित होनी चाहिये.

पर वह अपनी जगह है. अभी तो बैटल लाइन खिंच गयी है. खुदाई की जा रही है. उसमें और बहुत कुछ निकलेगा जो हमारी सोच में भी बदलाव लायेगा.