बाबूभाई कटारा की तरफदारी (?) में एक पोस्ट


मुझे भाजपा और कटारा पर तरस आ रहा है. जब मैं रतलाम में था तो झाबुआ-पंचमहल-दाहोद कांग्रेस के गढ़ हुआ करते थे. मैं आदिवासियों से पूछ्ता था कि देश का प्रधानमंत्री कौन है? तब या तो वे सवाल समझ नहीं पाते थे, या वेस्ता पटेल, कंतिलाल भूरिया अथवा सोमाजी डामोर जैसे स्थानीय कांग्रेसी का नामContinue reading “बाबूभाई कटारा की तरफदारी (?) में एक पोस्ट”

सड़क पर होती शादियां


हिन्दुस्तान में सड़क केवल सड़क नहीं है. जन्म से लेकर परलोक गमन के सभी संस्कार सड़क पर होते हैं. जीवन भी इन्हीं पर पलता है. सचिन तेन्दुलकर से लेकर मुन्ना बजरंगी तक इन्ही सड़कों पर बनते हैं. लोग ज्यादा हो गये हैं तो स्कूल, मैदान, मैरिज हॉल, धर्मशालायें कम पड़ने लगी हैं. लिहाजा शादियां इन्हीContinue reading “सड़क पर होती शादियां”

प्लास्टिक पर निर्भरता कम करने के तरीके.


मैं यह क्लिक-इफेक्टिव पोस्ट नहीं लिख रहा। प्लास्टिक के कचरे के बारे में कम ही लोगों ने पढा। पर आप क्लिक के लिए नहीं लिखते हैं। जिस मुद्दे पर आप महसूस करते हैं, उसपर कलम चलानी चाहिये। कम से कम ब्लागिंग है ही इस काम के लिए.मुझे लगता है की अपना कैरी बैग ले करContinue reading “प्लास्टिक पर निर्भरता कम करने के तरीके.”

प्लस्टिक का कचरा कब तक चलेगा?


“इकनामिस्ट” में है कि सेनफ्रंसिसको में प्लास्टिक के शॉपिंग बैग पर पाबन्दी लग गयी है. किराना वालों ने इस का विरोध किया है. पर कानून बनाने वालों ने सुनी नहीं. पता नहीं कैसे कानून बनाने वाले हैं वहां. हमारे यहां तो जनता के बिना बोले बहुत कुछ सुन लेते हैं. खैर. प्लास्टिक का कचरा वास्तवContinue reading “प्लस्टिक का कचरा कब तक चलेगा?”

बहुजन समाज पार्टी ने शिव जी का आशिर्वाद लिया


गौतम बुद्ध, अम्बेडकर, महामाया रोड/नगर/पार्क/क्रासिंग आदि का जमाना शायद पुराना हो गया है. वोट बैंक के गणित का तकाजा ऐसा हुआ कि बसपा ने शंकर जी का आशिर्वाद सेंक्शन करा लिया. सवेरे घूमने जाती मेरी मां ने खबर दी कि शिव कुटी के एतिहासिक मन्दिर पर बहुजन समाज पार्टी का झण्डा फहरा रहा है. चित्रContinue reading “बहुजन समाज पार्टी ने शिव जी का आशिर्वाद लिया”

शिक्षा के क्षेत्र में देश बैक फुट पर है.


सन 2005 में विश्वबैंक ने पड़ताल की थी. उसमें पता चला था कि हमारे देश में 25% प्रतिशत प्राइमरी स्कूल के अध्यापक तो काम पर जाते ही नहीं हैं. बाकी, जो जाते हैं उनमें से आधे कुछ पढ़ाते ही नहीं हैं. तनख्वाह ये पूरी उठाते हैं. यह हालत सरकारी स्कूलों की है. आप यहां पढ़Continue reading “शिक्षा के क्षेत्र में देश बैक फुट पर है.”