बाबूभाई कटारा की तरफदारी (?) में एक पोस्ट


मुझे भाजपा और कटारा पर तरस आ रहा है. जब मैं रतलाम में था तो झाबुआ-पंचमहल-दाहोद कांग्रेस के गढ़ हुआ करते थे. मैं आदिवासियों से पूछ्ता था कि देश का प्रधानमंत्री कौन है? तब या तो वे सवाल समझ नहीं पाते थे, या वेस्ता पटेल, कंतिलाल भूरिया अथवा सोमाजी डामोर जैसे स्थानीय कांग्रेसी का नामContinue reading “बाबूभाई कटारा की तरफदारी (?) में एक पोस्ट”

सड़क पर होती शादियां


हिन्दुस्तान में सड़क केवल सड़क नहीं है. जन्म से लेकर परलोक गमन के सभी संस्कार सड़क पर होते हैं. जीवन भी इन्हीं पर पलता है. सचिन तेन्दुलकर से लेकर मुन्ना बजरंगी तक इन्ही सड़कों पर बनते हैं. लोग ज्यादा हो गये हैं तो स्कूल, मैदान, मैरिज हॉल, धर्मशालायें कम पड़ने लगी हैं. लिहाजा शादियां इन्हीContinue reading “सड़क पर होती शादियां”

प्लास्टिक पर निर्भरता कम करने के तरीके.


मैं यह क्लिक-इफेक्टिव पोस्ट नहीं लिख रहा। प्लास्टिक के कचरे के बारे में कम ही लोगों ने पढा। पर आप क्लिक के लिए नहीं लिखते हैं। जिस मुद्दे पर आप महसूस करते हैं, उसपर कलम चलानी चाहिये। कम से कम ब्लागिंग है ही इस काम के लिए.मुझे लगता है की अपना कैरी बैग ले करContinue reading “प्लास्टिक पर निर्भरता कम करने के तरीके.”

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