अतिथि पोस्ट में एक दिन का आराम?(!)


आलोक ९२११ ने ’दांतो की देखभाल – हल्दी का प्रयोग’ पर टिप्पणी की थी – ’चलिए। ज्ञान जी का हफ़्ते में एक दिन तो आराम हो ही गया’। उनका आशय अतिथि पोस्ट में काम का बोझ अतिथि पर शिफ्ट होने से था। मैं उस आराम पर लिखना चाहता हूं। पंकज जी ने अगले सप्ताह कीContinue reading “अतिथि पोस्ट में एक दिन का आराम?(!)”

सरकारी मुलाजिम, पे-कमीशन और तनख्वाह की बढ़त


किसी सरकारी दफ्तर में चले जायें – घूम फिर कर चर्चा पे-कमीशन और उससे मिलने वाले बम्पर आय वृद्धि के बारे में चल जायेगी। जरा नीचे के चित्र में देखे कि इकॉनमिस्ट किस प्रकार की आयवृद्धि के कयास लगाता है विभिन्न देशों में सन 2008 में: उल्लेखनीय है कि यह मर्सर (Mercer) की ग्लोबल कम्पंशेसनContinue reading “सरकारी मुलाजिम, पे-कमीशन और तनख्वाह की बढ़त”

दांतों की देखभाल – हल्दी का प्रयोग


यह बुधवार का श्री पंकज अवधिया का स्वास्थ्य विषयक अतिथि लेख है। पंकज अवधिया वनस्पति वैज्ञानिक हैं और रायपुर में रहते हैं। उनके दूसरे ब्लॉग – पारम्परिक चिकित्सकीय ज्ञान में आप को उनके इण्टरनेट पर उपलब्ध अनेक लेखों के लिंक मिलेंगे जो उनकी विस्मय में डाल देने वाली ऊर्जा और व्यापक ज्ञान से आपको परिचयContinue reading “दांतों की देखभाल – हल्दी का प्रयोग”

टाटा, क्रायोजेनिक तकनीक, हाइड्रोजन ईंधन और मिनी बस


बैठे ठाले मेरे iGoogle पन्ने के गूगल समाचार ने लिंक दिया कि टाटा हाइड्रोजन आर्धरित मिनी बस बनायेगा। अंग्रेजी में सीफी, अर्थ टाइम्स, और टाइम्स ऑफ़ इण्डिया में ये लिंक मिले। बाद में नवभारत टाइम्स में भी यह लिंक हिन्दी में भी मिला। इनसे स्पष्ट होता है कि इसरो के साथ काम करते हुये टाटाContinue reading “टाटा, क्रायोजेनिक तकनीक, हाइड्रोजन ईंधन और मिनी बस”

जीवन मूल्य कहां खोजें?


(यह पोस्ट मेरी पिछली ’यदि हमारे पास चरित्र न हो’ विषयक दोनो पोस्टों पर आयी टिप्पणियों से प्रेरित है) नीति शतक का जमाना नहीं। धम्मपद का पढ़वैया कौन है? तिरुवल्लुवर को कौन पढ़/पलट रहा है? भग्वद्गीता के दैवीसम्पद (अध्याय १६) का मनन कौन कर रहा है? रामचरित मनस के उस प्रसंग को कौन खोज रहाContinue reading “जीवन मूल्य कहां खोजें?”

यदि हमारे पास यथेष्ट चरित्र न हो — २


(कल से आगे—) यदि हमारे पास यथेष्ट चरित्र न हो, तो छात्रो‍ के रूप मे‍ हम गम्भीर अध्ययन के कालयापन के स्थान पर अपने पाठ्यक्रम से अलग की गतिविधियो‍ मे‍ ही अधिक रुचि लेंगे और हम ऐसे विचारो‍ तथा कार्यों मे‍ व्यस्त रहेंगे, जो हमारे जीवन कालिका को गलत आकार देंगे और इसके फ़लस्वरूप हमContinue reading “यदि हमारे पास यथेष्ट चरित्र न हो — २”