पुस्तकों की बौछार – धड़ाधड़


डा. सुरेन्द्र सोनी की भेजी गयी रमण महर्षि पर पुस्तकें जैसी वासना, वैसा संग्रह। फाउण्टेन पेन की सदैव ललक है मुझे। दर्जनों इकठ्ठा हो जाते हैं। कल ही मेरी पत्नी स्टेशनरी की दुकान से मुझे घसीटती रहीं। पर तब भी एक तीस रुपये की फाउण्टेन पेन खरीदने में मैं कामयाब रहा। और तब वैसी खुशीContinue reading “पुस्तकों की बौछार – धड़ाधड़”