मानस पारायण और तनाव प्रबंधन


रामायण पाठ करती रीतारामायण पाठ करती रीता

मेरे साथ यात्रा करती मेरी पत्नी रीता की अचानक बुदबुदाती आवाज आती है। लैपटाप में मुंह घुसाये मैं पलट कर देखता हूं तो पाता हूं कि वे अपने पर्स से रामचरित मानस का गुटका निकाल कर पढ़ रही हैं। मैं समझ जाता हूं कि जैसे मैं ब्लॉग लिखने का प्रयोग तनाव प्रबंधन के लिये करता हूं; वैसे ही वे मानस पारायण का प्रयोग तनाव प्रबंधन के लिये कर रही हैं।

मानस पारायण, गुरुग्रंथ साहब का पाठ, रोज़री (माला) फेरना, गायत्री मंत्र का उच्चारण या लेखन या बापू का तकली चलाना – ये सब तनाव प्रबंधन की सात्विक एक्सरसाइजें हैं। हर व्यक्ति समय समय पर इनका या इन प्रकार की अन्य का प्रयोग करता है।

दीवार पर या पंचिंग बैग पर घूंसे मारना, अनाप-शनाप बुदबुदाना, फोन बैंग करना (पटकना) आदि तनाव को राजसिक प्रदर्शन के माध्यम से कम करने का जरीया है। शिकार पर जाना या मछली पकड़ना भी उस ब्रेकेट में रखा जा सकता है।

तामसिक तरीका क्या है जी? ड्रग्स लेना, नींद की गोली का नियमित सेवन, आलस्य को अपनी सामान्य स्टडी स्टेट मानना, खूब भकोसना (अनाप-शनाप खाना) शायद उसमें आता हो।

हम सब में सत्त्वस-रजस-तमस तीनों हैं। हम उन सभी का प्रयोग अपने तनाव प्रबंधन में करते हैं। उसमें से किसकी बहुतायत है – वह तय करता है कि हमारा व्यक्तित्व कैसा है।
ब्लॉगिंग किसमें आता है – सत्त्व/रजस/तमस में? 


माउण्टेन
मेरी पसंद

प्रशांत प्रियदर्शी का शेर

"खुदी को किया बुलंद इतना
और चढ गया पहाड़ पर जैसे तैसे..
खुदा बंदे से खुद पूछे,
बता बेटा अब उतरेगा कैसे!"


Published by Gyan Dutt Pandey

Exploring rural India with a curious lens and a calm heart. Once managed Indian Railways operations — now I study the rhythm of a village by the Ganges. Reverse-migrated to Vikrampur (Katka), Bhadohi, Uttar Pradesh. Writing at - gyandutt.com — reflections from a life “Beyond Seventy”. FB / Instagram / X : @gyandutt | FB Page : @gyanfb

25 thoughts on “मानस पारायण और तनाव प्रबंधन

  1. मीटींग ख़तम होने होने को है..तो डाक्टर लेट लतीफ़ यहाँ पहुँच पा रहे हैं ,लाज़िमी है..कि कुछ अर्ज़ भी करेंगे..सन 2003 से मैं अवसाद , विशेषकर वृद्धावस्था, अकेलेपन, या जीवन में असफल रह जाने से उपजे परिस्थितिजन्य अवसाद के उपचार के तौर पर ब्लागिंग की संस्तुति करता रहा हूँ । यह एकसफल उपचार साबित भी हो रहा है ।किंतु अभिव्यक्ति के माध्यम के रूप में भी यह एक सशक्त औज़ारहै, बाज़ारवाद इसको बढ़ावा दे तो रहा है किंतु इससे दुरुपयोग कीसंभावनायें भी बढ़ रही हैं ।कुछेकगण इसके एच.टी.एम.एल. और फ़्लैश प्रयोगों से चमत्कृतहो इधर उन्मुख हुये हैं ।केवल विद्वता को समाहित करने की इच्छा से सत्त्व/रजस/तमस का वर्गीकरण यहाँ करना नितांत निरर्थक है, क्योंकि यह तो स्वतः ही हरब्लाग पर दिख जा रहा है । बारंबारता की बेचैनी इसको वापस एक नयेकिस्म के मनोरोग की श्रेणी में धकेलती है । खैर..यह तो हर जगह है ।जैसे पूजा न कर पाने पर दिन भर उदिघ्न बने रहना भी एक ओब्सेशन (Obsession) को दर्शाता है, न कि व्यक्ति की अगाध श्रद्धा को..फिर ?ब्लागिंग को ब्लागिंग ही रहने दो.. .. कोई नाम न दो । सादर :-)

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  2. मैं तो आपके ब्लॉग को ही तनाव-प्रबंधन का स्रोत मानता हूँ.अब आप ही बताएँ…यह किस श्रेणी में फिट बैठता है ? =============================आभारडा.चन्द्रकुमार जैन

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  3. ये शेर हमने भी करीब एक साल पहले वहीँ सुना था जहाँ अनुरागजी ने… पर अच्छा है. तनाव दूर करने के तो कई तरीके हैं बस आजकल समय ही नहीं है :-)

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  4. कुछ लोग संगीत से भी तनाव दूर करते है ,कुछ लोग दोस्तों से गप्पे हांक कर …..ये शेर लाफ्टर चैलेन्ज में सुनाया हुआ है ….

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  5. ये तो इस बात पर निर्भर करेगा कि ब्लोग का प्रयोग आप किस उद्देश्य के लिये कर रहे हैं, तामसिक, राजसिक या सात्विक।

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  6. चाय पीना जिस श्रेणी में आता है, ब्लॉग को उसी में डाल दें. मैं तनाव मुक्त होने के लिए हास्य फिल्मे, धारावाहिक वगेरे देखता हूँ.

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  7. तनाव का इलाज काम भी है। बंदा काम में जुट जाये। बचे हुए काम को निपटाना यूं भी तनाव कम करता है। वैसे रामायण तो हमेशा ही रुचिकर ग्रंथ है। ब्लागिंग से तनाव कम होता है, पर इससे नये तनाव पैदा होते हैं। फिर भी ब्लागिंग को नशेबाजी माना भी जाये, तो भी यह नशेबाजी बुरी नहीं है। ब्लागिंग वैसे सबके लिए अलग अलग है। किसी के लिए नशेबाजी हो सकती है, किसी के लिए आत्माभिव्यक्ति का रास्ता, किसी के लिए नेटवर्किंग का रास्ता। कोई इसे आनलाइन भौं भौं का माध्यम मानता है। जाकि रही भावना जैसी,ब्लागिंग तिन दीखी तैसी

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