स्टीम इंजन युग के नागेश्वर नाथ


लगता है कि अगर संस्मरण लिखे जायें तो उनमें तथ्यों की गलती की गुंजाइश जरूर होगी पर उनको लिखने में खुद जीडी की बजाय एक काल्पनिक पात्र गढ़ कर लिखा जा सकता है। तब यह बंधन नहीं होगा कि तथ्य पूरी तरह सही नहीं हैं।

पीतल का हण्डा


चार पांच हजार का हण्डा केवल शादी के प्रतीक भर में से है। मैंने किसी को उसमें जल रखते नहीं देखा। दूर कुयें से पानी लाने की प्रथा या जरूरत भी खत्म होती गयी है। सिर पर गागर लिये चलती पनिहारिनें अब चित्रों में ही दीखती हैं।

उपेंद्र कुमार सिंह, समोसे और लाइफ L.I.F.E.


उपेंद्र जी की वाकपटुता/प्रगल्भता का एकनॉलेजमेण्ट उनकी पत्नी – श्रीमती सीमा सिंह भी हल्की मुस्कान के साथ करती हैं। प्रोफेसर (और अब वाइस चांसलर) सीमा जी हैं। पर बोलने का काम उपेंद्र कुमार सिंह जी करते हैं।

सिक्यूरिटी वाले और चेक पोस्ट


मेरे व्यक्तित्व में कुछ है जिसे किसी बैरियर पर चेक किया जाना अच्छा नहीं लगता। रेलवे का आदमी हूं और कभी न कभी टिकेट चेकर्स मेरे कर्मचारी हुआ करते थे। पर खुद मुझे टिकेट चेक कराना बहुत खराब लगता है।

साइकिल सैर की एक दोपहर – विचित्र अनुभव


वे दम्पति भारत के उस पक्ष को दिखाते हैं जो जाहिल-काहिल-नीच-संकुचित है। भारत अगर प्रगति नहीं करता तो ऐसे लोगों के कारण ही।

धंधुका – कांवर यात्रा में पड़ा दूसरा रेल स्टेशन


प्रेमसागर दोपहर दो-तीन बजे धंधुका रेलवे स्टेशन पर आ गये थे। वहां खाली पड़े रेलवे स्टेशन के डॉर्मेट्री वाले रेस्ट हाउस में जिसमे चार बिस्तर हैं; प्रेमसागर को जगह मिली। स्टेशन पर बिजली पानी की सुविधा है। काम लायक फर्नीचर भी है।