सवेरे के सपने 


धूमिल यादें प्रोस्टेट की दवाई अब अपने हिसाब से काम करने लगी है। रात में दो-तीन बार उठना होता है, कभी-कभी चार बार भी। किताबों में और यूट्यूब वाले बताते हैं कि शाम छह बजे के बाद पानी न पिया जाए, तो बेहतर रहता है। पर वह सब किताबी बातें हैं। रात तीन बजे नींदContinue reading “सवेरे के सपने “

नेपाल के बारे में बतियाते जवान 


गांवदेहात डायरी  उमरहाँ के विकास पांडे के यहां से शहद की दो बोतलें लेकर लौट रहा था। गांव के फाटक पर रुकना पड़ा—रेलवे फाटक बंद था। इतने में एक मोटर साइकिल बगल में आकर रुकी। तीन सवार थे—नौजवान। कोई बात कर रहे थे नेपाल की। एक ने मुझसे पूछा—साइकिल बैटरी वाली है? बात का दरवाजाContinue reading “नेपाल के बारे में बतियाते जवान “

हरिहर से बातचीत


गांवदेहात डायरी सालों बाद कटका के प्लेटफार्म नम्बर 2 पर गया। वहीं मिला हरिहर। अंधा है वह। हाथ में एक लाठी, बगल में एक झोला—जिसमें बिस्कुट के पैकेट। उन्हीं को लेकर वह ट्रेनों के कॉरिडोर में चलता और बेचता है। हरिहर प्लेटफार्म पर बैठने लगा तो किसी ने आगाह किया—“ट्रेन आवे वाली बा। आगे बैठबेContinue reading “हरिहर से बातचीत”

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