बच्चों को पढ़ाना – एक घरेलू टिप्पणी


मेरी पत्नीजी (रीता पाण्डेय) की प्रवीण पाण्डेय की पिछली पोस्ट पर यह टिप्पणी प्रवीण पर कम, मुझ पर कहीं गम्भीर प्रहार है। प्रवीण ने बच्चों को पढ़ाने का दायित्व स्वीकार कर और उसका सफलता पूर्वक निर्वहन कर मुझे निशाने पर ला दिया है। समस्या यह है कि मेरे ऊपर इस टिप्पणी को टाइप कर पोस्टContinue reading “बच्चों को पढ़ाना – एक घरेलू टिप्पणी”