कैथी और कांवरिये


पिछले शनिवार वाराणसी से औंडिहार जाते हुये सब ओर कांवरिये दिख रहे थे। बनारस आते हुये – उनके कांधे पर डण्डी और उससे लटकी छोटी छोटी प्लास्टिक की लुटिया/कमण्डल में गंगा जल। डण्डी अपनी अपनी श्रद्धा अनुसार सजाई हुयी – फूलों और आम की टेरियों से सजाने का युग अब समाप्त हो गया है। उनकेContinue reading “कैथी और कांवरिये”

पण्डित छन्नू लाल मिश्र


शुक्रवार को आदेश हुआ कि मंडुआडीह (वाराणसी) से नयी चलने वाली 15117/15118 मंडुआडीह-जबलपुर एक्स्प्रेस के उद्घाटन के अवसर पर पूर्वोत्तर रेलवे के चार विभागाध्यक्षों को उपस्थित रहना है। चार थे – निर्माण संगठन के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी श्री ओंकार सिंह, प्रमुख-मुख्य अभियन्ता श्री एच के अग्रवाल, मुख्य वाणिज्य प्रबन्धक श्री अशोक लाठे और मैं। कोहरेContinue reading “पण्डित छन्नू लाल मिश्र”

मार्कण्डेय महादेव


वाराणसी वरुणा से असी तक का क्षेत्र है। काशी कहां से कहां तक है? उस दिन मैने गोमती के संगम पर मार्कण्डेय महादेव का स्थल देखा – उसे दूसरी काशी भी कहा जाता है। तब लगा कि काशी शायद गोमती से अस्सी तक का क्षेत्र हो। यही वह क्षेत्र है जहां काशी के राजा दिवोदासContinue reading “मार्कण्डेय महादेव”