नत्तू गुण्डा पांड़े

Gyan674-001 आगे टीशर्ट चढ़ी तोंद और पीछे डायपर युक्त तशरीफ लिये साल भर के नत्तू को जब उसकी मां घसीट कर कमरे में ले जाने का यत्न करती है तो बद्द-बद्द चलते वह दूसरे हाथ और दोनो पैर से जो भी चीज सीमा में आ जाती है, उसको गिराने-लुढ़काने या ठोकर मारने का पूरा प्रयास करता है। उसकी नानी का कथन है कि उसकी जीनेटिक संरचना में बनारसी गुण्डों वाले गुणसूत्रतत्व प्रमुखता से आ जुड़े हैं।

उसे हम भागीरथ, प्रधानमंत्री या नोबल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक बनाने के चक्कर में थे; अभी फिलहाल उसका गुण्डत्व ही देख पाये हैं।

कोई भी चीज – कागज, मिट्टी, कलम, रिमोट, मोबाइल – नत्तू गुरू के हाथ में आने पर समझने के लिये मुंह में अवश्य जाती है!

मुझे सुद्ध (यह शब्द सयास यूं लिखा गया है) बनारसी गुण्डा से मिलने का सौभाग्य तो नहीं मिला है, पर जब तक नत्तू की पीढ़ी देश का भविष्य संभालेगी, तब तक अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत पर्याप्त गुण्डई छांटने की दशा में आ जायेगा। शायद अमेरिका को कोहनियाकर।

तब हमारी लीडरशिप में बनारसी गुण्डा के तत्व जरूरी होंगे और हमारी कॉरपोरेट जिन्दगी में भी – जो लम्बी दूरी तक जाकर आश्रितों और स्त्रियों की इज्जत जैसे उन गुण्डों के गुण, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर, दिखाते हुये गुण्डई कर सकें।

शायद बनारसी गुण्डा के कुछ तत्व प्रबन्धन की शिक्षा का अनिवार्य अंग बन सकें।

खैर हम तो फिलहाल नत्तू गुरू के ठुमुकि चलत के स्तर पर के गुण्डत्व का आनन्द ले चुके – तब, जब मेरी लडकी मेरे अस्वस्थ होने का समाचार पाकर इलाहाबाद आई थी। नत्तू पांड़े वापस जा चुके हैं बोकारो। अगली बार आयेंगे तो उनका न जाने कौन रूप सामने आये!


अगले कुछ दिनों/महीनों ब्लॉग पर अपनी आवृति कम करने का विचार है। मैं ब्लॉग पढ़ने का यत्न अवश्य करूंगा। पर लेखन कार्य कम ही होगा। कुछ पोस्टें ड्राफ्ट में उचक रही हैं – वे रुकी रहेंगी। शायद अपनी सामयिकता भी खो दें। प्रवीण पाण्डेय की एक पोस्ट ड्राफ्ट में है। वह अगले बुधवार को पब्लिश हो जायेगी। मेरी पत्नीजी ने एक पोस्ट लिख रखी है – शायद वह टाइप किये जाने का इन्तजार करेगी! :-(

दवाओं की अधिकता से अपना संतुलन खोये शरीर को शायद यह पॉज चाहिये। मन को तो मैं पाता हूं, टनाटन है!


Published by Gyan Dutt Pandey

Exploring rural India with a curious lens and a calm heart. Once managed Indian Railways operations — now I study the rhythm of a village by the Ganges. Reverse-migrated to Vikrampur (Katka), Bhadohi, Uttar Pradesh. Writing at - gyandutt.com — reflections from a life “Beyond Seventy”. FB / Instagram / X : @gyandutt | FB Page : @gyanfb

40 thoughts on “नत्तू गुण्डा पांड़े

  1. आपको स्वस्थ देख कर मन हर्षित है. बाबा विश्वनाथ से कामना करता हूँ कि आप पूर्ण स्वस्थ हो जांय.नत्तु गुरु को भी शुभ आशीष….जहाँ तक बनारसी गुंडा की बात है…बुजुर्गों से सुनी गुंडई याद है…. बनारसी गुंडे बड़े चरित्रवान भी होते थे…! आजकल के बदमाशो की तरह नहीं कि जिनका कोई ईमान नहीं होता. सेठ महाजन से उनका प्रतिशत तय रहता था..इसके बदले में वे पूरी सुरक्षा भी प्रदान करते थे. उनके महल्ले में क्या मजाल कि कोई किसी महिला के साथ अभद्र व्यवहार कर दे…!भगवान जाने सच क्या है ..मगर सुना है कि आजादी के संघर्ष में भी उनका योगदान था. जो पुरनियाँ हैं वे शायद इन बिंदुओं पर कुछ प्रकाश डाल सकें..

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  2. अरे क्या बोलते हो बॉस, एक तो आपकी पहली गलती ये है कि इत्त्ते दिनों बाद नत्तू पांड़े जी से मिलवा रहे हो। दूसरी बात ये कि हेडिंग पढ़कर न जाने क्यों मुझे वह बात याद आ गई जिसके कारण बलिया बागी बलिया कहलाने लगा।खैर, बाकी देखें तो नत्तू जी थोड़े और स्वस्थ हुए हैं पहले से। बाकी उनकी नानी से असहमत होने की हिम्मत तो दूरख्याल भी नहीं है। ;)चूंकि आपने हेडिंग में गुण्डा लिखा है तो जो पढ़ चुके हैं उन्हें प्रसाद जी की कहानी गुण्डा याद आनी ही है। जैसा कि अरविंद जी ने लिखा।बाकी आप तो चौकस रहें एक्दम्। बस ड्राफ्ट में सहेजे पोस्ट को पब्लिश करने भर का कष्ट उठाएं, टाइप करने का नहीं।वैसे सच कहूं तो आज नत्तू पांडे जी वाली ये पोस्ट पढ़कर मुझे बहुत सी बातें याद आई।मेरा सबसे दुलारा भतीजा, चौथे नंबर का। कल ही कोलकाता रवाना हुआ अपने पहले जॉब के लिए।, छोड़िए, लिखता हूं ब्लॉग पर ये सब।

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  3. नटखट पांडे से मिलकर बहुत अच्छा लगा और पहले की पोस्टें भी खंगाली उनसे मिलने को ….यही तो उम्र है जब बच्चे ऐसा न करें तो अच्छे नहीं लगते …

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  4. भारत जब गुण्डई करने की स्थिति में होगा तब नत्तू पाण्डे जी की यह ट्रेनिंग काम आयेगी । हमारा तो पूरा बचपन जिस गुण्डत्व की परिभाषायें सीखने में निकला, हमारे ही ऊपर उसका प्रयोग परिवार के स्तर पर बच्चे, देश के स्तर पर नेता और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका करता रहता है । अब तो नत्तू पाड़े को ही हमारा भी बदला लेने का ठेका लेना पड़ेगा ।लेखन में सृजनात्मक औषधि है । सृजन से आत्मा बल पाती है, आत्मा से मन और मन से शरीर । हम तो कहेंगे कि इस औषधि का ओवरडोज़ लिया जाये ।सप्ताह भर के लिये,मैं और मेरी दवाईयाँ(तनहाईयाँ)औरप्रकृति यहाँ एकान्त बैठ निज रूप सँवारतिके भावों में सन्निहित कुछ भाव निकालिये ।

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  5. नत्तू जी से मिलकर खुशी हुई। खूब आराम कर जल्दी स्वस्थ हो जाएँ।घुघूती बासूती

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  6. नत्तु पांडे की तस्वीरें और कारगुजारियां तो बड़ी मनोहारी हैं…आप पूर्ण स्वस्थ होकर पूरी तरह सक्रिय हों…शुभकामनाएं

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  7. @2846261925509831872.0"आप पोस्ट लिखना भले ही कम कर दीजिए, पर एकदम से बंद मत कीजियेगा… आपका रहना आश्वस्त करता है… जाने क्यों?"इसे मेरे भी मन की बात माने…

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