रविवार भोर ६ बजे

तख्ती पर बैठे पण्डा। जजमानों के इन्तजार में। गंगा तट पर नहाते पुरुष और स्त्रियां। पण्डा के बाईं ओर जमीन पर बैठा मुखारी करता जवाहिर लाल। गंगा बढ़ी हुई हैं। सावन में ही भदईं गंगा का अहसास!

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मात्र ९० डिग्री के कोण घूम कर उसी स्थान से लिया यह कोटेश्वर महादेव के मंदिर का चित्र! श्रावण मास की गहमागहमी। शंकर जी पर इतना पानी और दूध चढ़ाया जाता है कि वे जरूर भाग खड़े होते होंगे!

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और कुछ दूर यह आम के ठेले पर बैठा बच्चा। मुझसे पूछता है – का लेब्यअ! मानो आम के अलावा और कुछ भी बेचने को हो ठेले पर!

DSC02424 सांध्य अपडेट - 

रविवार की संझा

सांझ अलसाई सी। छुट्टी का दिन, सो बहुत से लोग और अनेक लुगाईयां। गंगा के किनारे खेलते अनेक बच्चे भी।

Ghat Evening 

कोटेश्वर महादेव मन्दिर के पास घाट की सीढ़ियों पर बहुत सी औरतें बैठीं थीं। कुछ यूं ही और कुछ किसी अनुष्ठान की प्रतीक्षा में। कोने की कोठरी में रहने वाले चुटपुटी महाशय एक मोटर साइकल वाले से उलझ रहे थे।

चुटपुटी एक क्लासिक चरित्र हैं। और भी बहुत से हैं। जिन्दगी जीने बखानने को बस डेढ़ किलोमीटर का दायरा चाहिये। बस! कोई ढ़ंग का लिखने वाला हो तो कोटेश्वर महादेव पर उपन्यास ठेल दे!

Koteshvar Evening


Published by Gyan Dutt Pandey

Exploring rural India with a curious lens and a calm heart. Once managed Indian Railways operations — now I study the rhythm of a village by the Ganges. Reverse-migrated to Vikrampur (Katka), Bhadohi, Uttar Pradesh. Writing at - gyandutt.com — reflections from a life “Beyond Seventy”. FB / Instagram / X : @gyandutt | FB Page : @gyanfb

45 thoughts on “रविवार भोर ६ बजे

  1. @Ghostbusterजी,कडी आपको ईमेल द्वारा भेज चुका हूँ।आराम से पढ़िए, बहुत लंबा रिपोर्ट है।ई मेल के साथ कुछ तसवीरें भी संलग्न हैं।यदि किसी और को इसमें रुचि हो तो कड़ी है:http://notepad.cc/share/RC5YqXgPIZयदि तसवीरें भी देखना चाहते हैं तो कृपया मुझे ईमैल करें। अवश्य भेजूँगा।शुभकामनाएंजी विश्वनाथ, बेंगळूरु

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  2. ganga ghat ka vivran-chitrande gani da bhore-bhorsab bachban daur lagawantippani karan us orke ham bhi usi ma mil gayehame bhi ashish dai den.sk jha chd

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  3. अहा!कई दिनों बाद (जै गंगा मईया)तस्वीरों के लिये आभारसही कहा जी – डेढ किलोमीटर के दायरे में काफी कुछ बखानने को पडा है। चुटपुटी का चित्रण कब करेंगें?प्रणाम

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  4. ब्लाग जगत में मानसिक हलचल का पुनरागमन भला लगा। जैसे बैटरी चार्ज हो गई हो। शंकर जी जरूर भाग खड़े होते होंगे। आप ने यह चित्र रविवार को लिया है। आप सोमवार दोपहर को ले सकें तो वह बहुत सुंदर होगा। युवावस्था में जब दादा जी के साथ मंदिर में रहा करता था तो सावन के सोमवार को दोपहर मंदिर के पट बंद होने के उपरांत शंकर जी के मंदिर की सफाई मुझे करनी पड़ती थी। बीस सीढ़ी नीचे स्थित कुएँ से करीब चालीस फुट की रस्सी से खींच कर लाया गया दस बाल्टी पानी सफाई के लिए कम पड़ जाता था। पर शंकर जी की सफाई जरूरी थी। सावन के सोमवार की शाम उन्हें दूल्हे राजा की तरह सजा कर भक्तों के लिए झाँकी जो तैयार करनी पड़ती थी।

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  5. स्वास्थय सुधार देखकर प्रसन्नता हो रही है..बस, आराम से जरा. तस्वीरें अच्छी है. आपे शुरु किया जाये कोटेश्वर महादेव पर उपन्यास.

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