“रुद्र” काशिकेय पर प्रथम टीप


अपनी मूर्खता पर हंसी आती है। कुछ वैसा हुआ – छोरा बगल में ढुंढाई शहर में!  राहुल सिंह जी की टिप्पणी थी टल्लू वाली पोस्ट पर – अपरिग्रही टल्‍लू ने जीवन के सत्‍य का संधान कर लिया है और आपने टल्‍लू का, बधाई। जगदेव पुरी जी से आपकी मुलाकात होती रहे। अब आपसे क्‍या कहेंContinue reading ““रुद्र” काशिकेय पर प्रथम टीप”