भाग ६ – कैलीफिर्निया में श्री विश्वनाथ

यह श्री गोपालकृष्ण विश्वनाथ की अमरीकी/कैलीफोर्निया प्रवास पर छठी अतिथि पोस्ट है।


इस बार बातें कम करेंगे और केवल चित्रों के माध्यम से आप से संप्रेषण करेंगे।

शॉपिंग:
=========
एक जमाना था, जब हम विदेश से चीजें खरीदकर लाने में गर्व महसूस करते थे। अब भूल जाइए इस बात को। कुछ चीज़ों को छोडकर, हम भारतीयों के लिए वहाँ से कुछ खरीदना मूर्खता ही लगता है।

सब कुछ यहाँ भारत में उपलब्ध है और बहुत ही कम दामों में।
कई सारी चीज़ें तो भारत, चीन, बंगला देश से वहाँ भेजी जाती हैं जहाँ तीन या चार गुना दामों पर बिकती हैं।

वैसे मॉल्स तो बहुत अच्छे हैं और हमारे मॉल्स से बडे हैं। चित्र देखिए।
Picture 1 (Small) (2)

हमने कई सारे मॉल्स देखे पर वहां कुछ खरीदने से हिचकते थे। पत्नी चीज़ें देखती थीं,  अच्छी लगती थीं फ़िर दाम देखती थीं और झट मन में डॉलर को रुपयों में बदलती थीं  और फ़िर चौंक जाती थी।

हम दूर से तमाशा देखते रहते थे।

Picture 2 (Small) Picture 3 (Small) Picture 4 (Small)

बस किसी तरह कुछ तो वहाँ से खरीदकर ले ले जाना  ही था।

लोग क्या कहेंगे? अरे! अमरीका से कुछ नहीं लाया? पत्नि ने अपनी लालसा पूरी की। यह देखिए, पत्नी और बेटी किन चीज़ों से आकर्षित हुए हैं। यहाँ की सभी वस्तुएं  एशियाई देशों से वहाँ पहुंची हैं।

हमें चुप और खुश करने के लिए हम से पूछे बगैर मेरे लिए कुछ कपडे और एक घडी  खरीदकर दी ।
Picture 5 (Small)

जैसा मैंने पहली किश्त में बताया था, अमरीकी लोग ज्यादा दिखाई नहीं देंगे आपको।
चेहरे देखिए इस चित्र में। ग्राहक चीनी या कोरियाई लगते हैं।
picture 6 (Small)

एक बात हमें पसन्द आई। जब मॉल वाले कोई नई खाने लायक चीज़ बेचना चाहते हैं तो फ़्री सैंपल (free sample) का प्रबन्ध है। इस महिला को देखिए जो फ़्री सैंपल तैयार कर रही है। हमने अवसर पाकर खूब इन चीज़ों को चखा।

यह भी अच्छी चाल है। हम तो भोले भाले हैं। फ़्री सैंपल चखने के बाद वहाँ से छुपके से खिसक जाना हमें अच्छा नहीं लगा।
क्या सोचेंगे यह अमरीकी लोग भारतवासियों के बारे में? मन की शान्ति के लिए कुछ खरीदना पड़ा। :-(
Picture 7 (Small)

बर्फ़ का अनुभव
============
आजीवन हम पश्चिम या दक्षिण भारत में ही रहे हैं। हमने ज़िन्दगी में बर्फ़ का अनुभव कभी नहीं किया था। कभी कशमीर या सिमला गए ही नहीं।

यह मेरा पहला मौका था बर्फ़ को देखने, छूने और उसका अनुभव करने का। हम Squaw  Valley  गये थे, जो Lake Tahoe  टैहो के पास है। आप बर्फ़ की तसवीरें देखिए। उसपर चलने में थोडी कठिनाई हुई| चलने में पैर फ़िसलने का डर रहता था। पर कुछ देर बाद आसानी से चल सके।
picture 8 (Small)

पहली बार स्नोमैन (snowman) बनाने की कोशिश की। फ़्लॉप हुआ मेरा प्रोजेक्ट।
गणेशजी की मूर्ति बनाने निकला था और देखिए क्या बना पाया।
picture 9 (Small)

फ़िर भी गर्व से उस की एक तसवीर लेने में मुझे झिझक नहीं हुई।
picture 10 (Small)

Lake Tahoe भी गया था। अति सुन्दर झील है यह। एक किनारे पर रेत और दूसरे किनारे पर चिकने और गोल गोल कंकड।
पानी इतना ठंडा और शुद्ध कि हम तो बिना किसी हिचक उसे अपने हथिलियों में लेकर पीने लगे। भारत में हिम्मत नहीं होती ऐसी झीलों से पीने की, सिवाय हरिद्वार / हृषिकेश में गंगा के पानी के।
Picture 11 (Small)

 Picture 12 (Small)

सैन फ़्रैन्सिस्को
==========
दो बार सैन फ़्रैन्सिस्को गया था। पत्नी के लाख मना करने के बावजूद, हम Apple I Store के अन्दर झांकने से अपने आप को रोक नहीं सके| उसे चिढ है इन गैड्जेटों से। कहती है "तुम्हारा इन चीज़ों से लगाव अस्थायी होता है। बाद में मुझे ही इन चीज़ों पर जमे धूल को साफ़ करना पडता है।"

करीब बीस मिनट Apple का  नया Ipad को आजमाया। कमाल की चीज़ है यह। काश यहाँ भारत में उपलब्ध होता।

picture 13 (Small) picture 14 (Small)

छोटी मोटी दुकानें तो कई सारे देखीं| दो नमूने पेश हैं:

  1. इस दुकान में केवल चॉकलेट बिकते हैं और कोई चीज़ नहीं।
    बच्चे  तो यहाँ से बाहर निकलना ही नहीं चाहेंगे। वैसे हम भी किसी बच्चे से कम नहीं, इस विषय में।
    picture 15 (Small)
  2. इस बेकरी को देखिए| डबल रोटी नाना प्रकार की अकृतियों में बना रहे हैं। बच्चों को यह बहुत भाता है
    picture 16 (Small) Picture 17 (Small)

सैन फ़्रैन्सिस्को चिडियाघर भी गया था| कुछ खास नहीं पर एक मोर को देखने पर भारत (जयपुर और पिलानी) की याद आ गई| मोर पिंजरे में बन्द नहीं था और इधर उधर घूमता रहता था|
picture 18 (Small)

और देखिए इस गोलमटोल और रोयेंदार भेड़ को। वह भी स्वतंत्रता से घूम रहा था और हमे इसे छूने ओर सहलाने कि अनुमति थी। केवल कुछ खिलाना भर वर्जित था।
picture 19 (Small)

जिन्दगी में पहली बार एक ध्रुवीय भालू( polar bear) देखा।
picture 20 (Small)

आगे अगली किस्त में ।
शुभकामनाएं
जी विश्वनाथ


Published by Gyan Dutt Pandey

Exploring rural India with a curious lens and a calm heart. Once managed Indian Railways operations — now I study the rhythm of a village by the Ganges. Reverse-migrated to Vikrampur (Katka), Bhadohi, Uttar Pradesh. Writing at - gyandutt.com — reflections from a life “Beyond Seventy”. FB / Instagram / X : @gyandutt | FB Page : @gyanfb

34 thoughts on “भाग ६ – कैलीफिर्निया में श्री विश्वनाथ

  1. बहुत बढ़िया लगा यह सचित्र यात्रा वर्णन। कई नई जानकारियाँ मिलीं और हम घूम लिए कैलिफोर्निया। पहली फुर्सत में पिछली कड़ियों की सैर करने निकलता हूँ।

    Like

  2. रहने दीजिए ज्ञानजी,आप वैसी भी हमारे लिए बहुत कुछ कर रहे हैंआपको ज्यादा कष्ट नहीं देना चाहतामेरा Photobucket.com पर account है।अगली बार मैं स्वयं कुछ समय निकालकर तसवीरें upload करूंगा।हरेक तसवीर की कडी का उल्लेख भी करूंगा अपनी पोस्ट में।यही सबसे आसान तरीका है। आपका ब्लॉग पर load हल्का ही रहेगा।फ़िलहाल आप को कुछ अलग या extra करने की कोई आवश्यकता नहीं।बस उसे resize करके छाप दीजिए, जैसा आप अभी कर रहे हैंसातवीं किस्त के बारे में सोच रहा हूँ। कुछ ही दिनों में आपको भेज दूंगा।जी विश्वनाथ

    Like

  3. एक, दो नहीं, पूरे बीस चित्र। नयाभिराम भी और ढेरों सूचनाऍं देनेवाले भी। लगा, हम न केवल सब देख रहे हैं बल्कि वहीं मौजूद भी हैं। कोटिश: धन्‍यवाद। उम्‍मीद है, चित्रों का यह क्रम अभी निरन्‍तर रहेगा।अब सौन्‍दर्य सामग्री लाने का भी कोई मतलब नहीं रहा। बाजार में 'कुरुपता मापी मीटर' आ गए हैं (ज्‍यादा जानकारी श्री रवि रतलामी से ली जा सकती है) और सब जानते हैं कि झूठ बोलने का एकाधिकार मनुष्‍य के पास है। मशीन तो सच बोलती है – पूरी निर्मममता से।

    Like

  4. चित्रों को बड़े आकार में अपलोड करने की डिमाण्ड है। विण्डोज़ लाइवराइटर के माध्यम से अपलोड़ करने पर वह पोस्ट पर जिस आकार की रखी जा रही है, उसी की अपलोड होती है।विकल्प पिकासा आदि पर अपलोड कर लिंक करने का है। पर वह मेहनत का काम है! और अभी मैं जिस चीज से बच रहा हूं वह है मेहनत! :)

    Like

  5. @Blogger भारतीय नागरिक – Indian Citizen, @Blogger मनोज कुमारटिप्पणी के लिए धन्यवाद। @Blogger प्रवीण त्रिवेदीअन्य मित्रों का भी यही शिकायत है कि तसवीरें बहुत छोटी हैंअगली बार ज्ञानजी से इसके बारे में चर्चा करेंगे।कोई उपाय शायद मिल जाएगाइसके अलावा अब सोच रहा हूँ के भविष्य में इन तसवीरों को किसी web site पर upload कर दूँगा।ब्लॉग में छोटी मीडियम आकारों के तसवीरों के साथ, पूरी तसवीर की कडी भी छाप देता हूँ ताकि जिनको रुचि हो, वे देख सकें।शुभकामनाएं===========

    Like

  6. चित्रमय पोस्ट पर चित्र और बड़े होने ही चाहिए !विश्वनाथ जी !चित्रों को सामान्य रूप ४००*३०० के रूप में तो रखा ही जाना चाहिए ही था ! पोस्ट का मजा और बढ़ जाता ? रही बात ब्लॉग के लोड होने की तो पोस्ट करते समय उनको छोटे आकार में रखा जाता …पर अपलोड तो पूरा चित्र करना चाहिए था ! बहरहाल आपकी यात्रा से बहुत कुछ जानने को मिल रहा है ……..हम जैसों को ?

    Like

  7. रोचक विवरण. यहां तो नदियों को प्रदूषित करने का अभियान ही चला रखा है. अब तो गंगोत्री से नीचे ही गंगा में मैल मिलाया जाने लगा है…

    Like

  8. @rashmi ravija said…अरे, हम तो मजाक कर रहे थे।देखने में इतना बुरा तो नहीं हूँ?वैसे आजकल के मर्द भी cosmetics का प्रयोग करने लगे हैंafter shave lotion, cream, powder, body spray, वगैरह की काफ़ी अच्छी बिक्री हो रही है।@काकेशNotion Ink Adam को google कीजिए।लगता है कि Apple I pad की छुट्टी होने वाली है।@Blogger cmpershadआपकी बात भी सही है।कोई भी चीज़ यदि यहाँ एक रुपये में बिकती है तो उसका वहाँ ३ या चार रुपया में बिकना सही है।पर इसके लिए कमाने वाले की आमदनी भी डॉलर में होनी चाहिए।पर हम तो रुपयों में कमाते हैं। हमारे लिए तो दाम बिल्कुल सही नहीं।हमें वहाँ कुछ खरीदनी नहीं चाहिए, उलटा हमें उनको बेचना चाहिए।यह केवल मेरा विचार है।

    Like

Leave a reply to प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI Cancel reply

Discover more from मानसिक हलचल

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading

Design a site like this with WordPress.com
Get started