ये हैं हमारे गंगा स्नान करने वाले “सभ्य” लोग


शिवकुटी के सवर्णघाट पर नित्य 200-300 लोग पंहुचते होंगे। नहाने वाले करीब 50-75 और शेष अपने घर का कचरा डालने वाले या मात्र गंगातट की रहचह लेने वाले।

ये लोग अपेक्षकृत पढ़े लिखे तबके के हैं। श्रमिक वर्ग के नहीं हैं। निम्न मध्यम वर्ग़ से लेकर मध्य मध्यम वर्ग के होते हैं ये लोग। कुछ कारों में आने वाले भी हैं।

ये लोग जहां नहाते हैं, वहीं घर से लाया नवरात्रि पूजा का कचरा फैंक देते हैं। कुछ लोगों को वहीं पास में गमछा-धोती-लुंगी समेट कर मूत्र विसर्जन करते भी देखा है। बात करने में उनके बराबर धार्मिक और सभ्य कोई होगा नहीं।

गंगामाई के ये भक्त कितनी अश्रद्धा दिखाते हैं अपने कर्म से गंगाजी के प्रति!

आज मैने एक चिन्दियां समेटने वाले व्यक्ति को भी वहां देखा। वह उनको आग लगा कर नष्ट करने का असफल प्रयास कर रहा था। कम से कम यह व्यक्ति कुछ बेहतर करने का यत्न तो कर रहा था!

This slideshow requires JavaScript.