हाथ से मछली बीनते बच्चे – तकनीक का विकास


वे पहले हाथ से बीन रहे थे मछली। आज देखा तो पाया कि उन्होने तकनीक विकसित कर ली है। उसी जगह एक चादर का प्रयोग बतौर जाल के रूप में कर रहे थे। गंगाजी के पानी से बने तालाब में एक ओर से शुरू कर दूसरी ओर तक ला रहे थे चादर को। कोशिश कर रहे थे कि चादर तालाब की तली के समीप से फिरायें। दो बच्चे यह काम कर रहे थे। एक व्यक्ति – ग्राहक – एक पॉलीथीन की पन्नी ले कर किनारे खड़ा था उनसे मछली खरीदने को।

सूरज भगवान थोड़ा देर कर रहे थे उगने में।