हाथ से मछली बीनते बच्चे – तकनीक का विकास

वे पहले हाथ से बीन रहे थे मछली। आज देखा तो पाया कि उन्होने तकनीक विकसित कर ली है। उसी जगह एक चादर का प्रयोग बतौर जाल के रूप में कर रहे थे। गंगाजी के पानी से बने तालाब में एक ओर से शुरू कर दूसरी ओर तक ला रहे थे चादर को। कोशिश कर रहे थे कि चादर तालाब की तली के समीप से फिरायें। दो बच्चे यह काम कर रहे थे। एक व्यक्ति – ग्राहक – एक पॉलीथीन की पन्नी ले कर किनारे खड़ा था उनसे मछली खरीदने को।

सूरज भगवान थोड़ा देर कर रहे थे उगने में।

Author: Gyan Dutt Pandey

Exploring village life. Past - managed train operations of IRlys in various senior posts. Spent idle time at River Ganges. Now reverse migrated to a village Vikrampur (Katka), Bhadohi, UP. Blog: https://gyandutt.com/ Facebook, Instagram and Twitter IDs: gyandutt Facebook Page: gyanfb

10 thoughts on “हाथ से मछली बीनते बच्चे – तकनीक का विकास”

  1. समझ नहीं आया कि ये पोलीथीन वाला बाउ ख़ुद ही मछली क्यों नही पकड़ लेता 🙂

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  2. Haridwar gaya tha pichhle shaniwar. Kuch ladke ek dande mein chumbak ke gole fansa kar behti dhara mein unko dubo rahe the. Bahar nikalne par un chumbak ke golon se sate hue ek ek rupaye ke sikke kya khoob chamak rahe the subah ki dhoop mein!

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    1. वाह! क्या तकनीक है। चुम्बक से रुपया खींचना। यह जान कर पता चला कि रुपया चुम्बक से खिंचता है मैं सोचता था कि एक धातु-मिश्रण होने के कारण इसमें चुम्बकीय गुण नहीं होते!

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    2. Due to a keyboard issue,Will Hindi be written in roman script in future?
      Think….most of Hindi film songs lyrics are written in English on Internet but not in Hindi.

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