झरे हुये पत्ते


रेलवे कालोनी, गोरखपुर में पेड़ बहुत हैं। हरा भरा क्षेत्र। सो पत्ते भी बहुत झरते हैं। सींक वाली बेंट लगी बड़ी झाड़ुओं से बुहारते देखता हूं सवेरे कर्मियों को। बुहार कर पत्तों की ढेरियां बनाते पाया है। पर उसके बाद प्रश्न था कि क्या किया जाता है इन सूखी पत्तियों का? कहीं कहीं जलाया हुआContinue reading “झरे हुये पत्ते”

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