टमटम पर प्रचारक


वह अपनी टमटम पर आया था कतरास से। पूरे चुनाव के दौरान सांसद महोदय (श्री रवीन्द्र पाण्डेय) का प्रचार किया था उसने लगभग दो हफ्ते। नाम है विद्यासागर चौहान। विकलांग है। पैर नहीं हैं। किसी तरह से टमटम पर बैठता है। उसकी आवाज में दम है और जोश भी। दम और जोश प्रचार के लियेContinue reading “टमटम पर प्रचारक”

लता और प्रदीप ओझा


होशंगाबाद से लौटते समय मेरे पास एक काम था – प्रदीप ओझा के घर जाना। प्रदीप भोपाल रेल मण्डल में वरिष्ठ मण्डल परिचालन प्रबन्धक हैं। जब मैं उत्तर-मध्य रेलवे में मालगाड़ी परिचालन का कार्य देखता था, तो प्रदीप इलाहाबाद मण्डल के वरिठ मण्डल परिचालन प्रबन्धक हुआ करते थे। वे एक ऐसे अफसर हैं जो सोते-जागतेContinue reading “लता और प्रदीप ओझा”

होशंगाबाद – भोपाल से नर्मदामाई की ओर दौड़


नर्मदा और गंगा – दोनो की साड़ी पुरानी और मैली हो गयी है। बस; नर्मदा की साड़ी अभी जर्जर नहीं हुई। उसके छींट के रंग कुछ बदरंग हुये हैं पर अभी भी पहचाने जा सकते हैं। गंगाजी की धोती पुरानी और जर्जर हो गयी है। उसमें लगे पैबन्द भी फट गये हैं। गंगामाई बमुश्किल अपनी इज्जत ढ़ंक-तोप कर चल पा रही हैं। मंथर गति से। आंसू बहाती। अपनी गरिमा अपनी जर्जर पोटली में लिये। और निर्लज्ज भक्त नारा लगाते हैं – जै गंगा माई। :-(

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