निरजिया तीन महीने से इंतजार कर रही है। रात दिन अपने मरसेधू से बात करती रहती है फोन पर। उसका बस चले तो बिना किसी भोज-समारोह, गहना गुरिया या सामान-असबाब के लड़के के साथ चली जाये।
भारतीय रेल का पूर्व विभागाध्यक्ष, अब साइकिल से चलता गाँव का निवासी। गंगा किनारे रहते हुए जीवन को नये नज़रिये से देखता हूँ। सत्तर की उम्र में भी सीखने और साझा करने की यात्रा जारी है।
निरजिया तीन महीने से इंतजार कर रही है। रात दिन अपने मरसेधू से बात करती रहती है फोन पर। उसका बस चले तो बिना किसी भोज-समारोह, गहना गुरिया या सामान-असबाब के लड़के के साथ चली जाये।