मिश्रीलाल सोनकर से एक और मुलाकात


पचासी साल का आदमी, अपने बारे में लिखा देख और सुन कर कितना प्रसन्न होता है, वह अहसास मुझे हुआ। उनकी वाणी मुखर हो गयी। बताया कि अपनी जवानी में वे मुगदर भांजा करते थे। “सामने क लोग मसड़ (मच्छर) अस लागत रहें तब।”

किरीट सोलंकी के चित्र


पचहत्तर की उम्र। शारीरिक समस्यायें। जीवन साथी का विछोह। और अनुभवों का एक लम्बा कालखण्ड! किरीट जी अगर सम्पर्क में रहे हो सोचने और लिखने को बहुत कुछ होगा। रेलवे भी उसमें हो उसमें शायद!

Create your own website, free on WordPress.com.Create your own website.
Start free