महराजगंज बजरिया के पहले ढूंढ़ी एक कुर्सी पर बैठे थे। मैं सड़क पर साइकिल से गुजर रहा था। उन्हें नहीं देखा पर उन्होने मुझे जोर से आवाज दी। मैं रुका, अपनी साइकिल पीछे ली तो ढूंढ़ी लपक कर आये। “हमरो फोटो हींचि क खबर सगरौं दौड़ाई दिहे जीजा!” – उन्होने कहा। फिर बड़ी फुर्ती से अपने गर्म जैकेट का बटन खोल कर कमीज का बांई ओर का वह हिस्सा दिखाया जिसपर किसी सिक्यूरिटी कम्पनी का लोगो बना था।
गार्ड की नौकरी लग गयी है – यह उनकी बात से स्पष्ट हुआ। अधेड़ आदमी को वाचमैनी की नौकरी मिल जाये, इससे बढ़िया और क्या हो सकता है। उनकी प्रसन्नता की गहराई मेरी समझ आ गयी।
मैने उन्हें बधाई दी। जेब से अपना फीचर फोन निकाल कर उनका फोटो खींचा। ढूंढ़ी ने एक कुशल अभिनेता की तरह पोज दिया। वे जानते हैं कि ब्लॉग में कुछ छपेगा और आसपास के दो-चार लोग उनको आ कर बतायेंगे। वे खुद तो फीचर फोन युग से अभी आगे बढ़े नहीं हैं।
ढूंढ़ी मेरे गांव के हैंं। पिछ्ले ग्रामसभा चुनाव में परधानी लड़ने के लिये मैदान में कूदे थे पर तब परधानी ओबीसी की बजाय अनुसूचित खाते में चली गयी। उसके बाद पड़ाव की ओर उन्होने एक चाय की गुमटी लगाई। पर मेरे हिसाब से वह लोकेशन मौके की नहीं थी। ज्यादा चली नहीं। कब बंद हुई, पता नहीं चला।
ढूंढ़ी यादव से मेरा परिचय इस गांव में शिफ्ट होने के समय से है। तब सर्दियों की शुरुआत थी। ढूंढ़ी कडाहे में गुड़ बना रहे थे। बिना परिचय के भी उन्होने मुझे ताजा गुड़ खिलाया था और आधा एक सेर घर पर भी ले कर आ गये थे । मैं नया नया गांव में आया था और लोगों में आत्मीयता की तलाश कर रहा था। वह ढूंढ़ी के माध्यम से भरपूर मिली। आठ साल हो गये उस बात को। तब से वे मेरे मित्र हैं!
ढूंढ़ी खांटी समाजवादी हैं। पर अब जब मध्यप्रदेश में भाजपा ने ने एक यादव को मुख्यमंत्री बना कर सेंधमारी की है; उनका मन कुछ भाजपाई हुआ हो शायद। छोटी से मुलाकात में वह उनसे पूछ नहीं पाया। फिर कभी पूछूंगा!
उनकी गार्ड की नौकरी लगने से मुझे बहुत खुशी है। उन्होने “खबर सगरौं दौड़ाने (सब तरफ फैलाने)” को कहा था। कहते हुये ऊपर की ओर सुदर्शन चक्र घुमाने की मुद्रा में अपनी तर्जनी भी घुमाई थी। उसी के लिये यह पोस्ट लिख रहा हूं। ढूंढी मेरे ब्लॉग के चरित्र पहले ही हैं। एक पोस्ट और सही! :lol:
ढूंढी यादव पर पोस्टें –


ढूंढी जी को हार्दिक बधाई…
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ढूढी यादव को सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी मिलने की बहुत-बहुत बधाई
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आपको बधाई देने के लिये धन्यवाद। आशा है ढूंढ़ी जी को भी पता चल जायेगा! उनका भतीजा दिन भर मोबाइल में भिड़ा रहता है। जरूर पढ़ता होगा!
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