द्वारिकापुर में गंगा किनारे पीपल का बिरवा बड़ा हो रहा है।


गंगा किनारे एक बड़े पीपल के पेड़ से adequate social distancing पर है यह। बड़ा होकर शायद कोरोना युग की याद करे। क्या पता लोग श्राद्ध के घण्ट भी बांधने लगें इसपर। या कोई साधू इसकी छाया में कुटिया बनाए! जो होगा, देखने के लिए अभी तुम चलोगे जीडी! 😁

अक्षयपात्र और शिवाला में पथिकों को मिलता है भोजन और विश्राम


इस समय सारा वातावरण परस्पर करुणा, स्नेह और भाईचारे का है। धार्मिक भेदभाव भी गायब है। अन्यथा शिवाला और मोहम्मद जहीरुद्दीन – mutually exclusive नाम हैं!

गांव को लौटते हतप्रभ और हारे श्रमिकों को भोजन


गरीब और विपन्न हैं। छ दिन पैदल चलने पर शरीर और मन टूट गया है। पर फिर भी अपने जेठ का आदर और किसी बाहरी के देखने पर मुंंह छिपा लेने का शिष्टाचार अभी उनमें बरकरार है।

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