यह पोस्ट श्री प्रवीण पाण्डेय की अतिथि पोस्ट है। प्रवीण बेंगळुरू रेल मण्डल के वरिष्ठ मण्डल वाणिज्य प्रबन्धक हैं। प्रवीण इस विषय पर दो और पोस्टें प्रस्तुत करेंगे -एक एक दिन के अंतराल पर। विषय यदि एब्स्ट्रैक्ट हो तो चिन्तन प्रक्रिया में दिमाग का फिचकुर निकल आता है। महानता भी उसी श्रेणी में आता है।Continue reading “महानता के मानक”
Author Archives: Gyan Dutt Pandey
दहेज
वक्र टिप्पणियों का बहुधा मैं बुरा नहीं मानता। शायद मैं भी करता रहता हूं। पर विवेक सिंह की यह पिछली पोस्ट पर वक्र टिप्पणी चुभ गई: "मेरी पत्नीजी के खेत का गेंहूं है।" क्या ! आप अभी तक दहेज लिए जा रहे है ? याद आया अपनी शादी के समय का वह तनाव। मैं परम्पराContinue reading “दहेज”
दहेज
वक्र टिप्पणियों का बहुधा मैं बुरा नहीं मानता। शायद मैं भी करता रहता हूं। पर विवेक सिंह की यह पिछली पोस्ट पर वक्र टिप्पणी चुभ गई: “मेरी पत्नीजी के खेत का गेंहूं है।” क्या ! आप अभी तक दहेज लिए जा रहे है ?
