टहनियों की छंटाई


*** टहनियों की छंटाई *** सुग्गी के लड़के हैं – गोविंद और राजा। गोविंद बीस-इक्कीस का होगा और राजा उससे दो-तीन साल छोटा। दोनो ने मिल कर मेरे घर के सागौन और पलाश के उन टहनियों को छांटा जो सूरज की रोशनी रोकती थीं। मौसम बदलने की अपनी जरूरते हैं। गर्मी में हमें छाया चाहिये।Continue reading “टहनियों की छंटाई”

रेल यात्रा का भय


सवेरे चार बजे नींद खुलने का समय होता है। आमतौर पर नींद एक सुखद अहसास के साथ खुलती है। आज वह एक (दु:) स्वप्न के साथ खुली। भोर के सपने में देखा कि मैं प्लेटफार्म पर खड़ा हूं। ट्रेन लगी है और मुझे यह भी नहीं याद कि किस ट्रेन में किस कोच में मुझेContinue reading “रेल यात्रा का भय”

सियार


<<< सियार >>> जीटी रोड के किनारे के इस गांव में बसे एक दशक होने को आया और मैं गांव की पहचान के तत्वों को ढहते देखता रहा हूं। जो तत्व अभी भी कायम हैं, उनमें से एक है – सर्दियों के महीने में शाम होते ही उठती सियार की हुआं हुआं करती आवाजें। मेरेContinue reading “सियार”

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