पश्चिम रेलवे के रतलाम मण्डल के स्टेशनों पर रॉबर्ट फ्रॉस्ट की कविता का हिन्दी अनुवाद टंगा रहता था। यह पंक्तियां नेहरू जी को अत्यन्त प्रिय थीं: गहन सघन मनमोहक वन, तरु मुझको याद दिलाते हैं किन्तु किये जो वादे मैने याद मुझे आ जाते हैं अभी कहाँ आराम बदा यह मूक निमंत्रण छलना हैContinue reading “अभी कहां आराम बदा…”
Author Archives: Gyan Dutt Pandey
एक सामान्य सा दिन
एक सामान्य सा दिन कितना सामान्य होता है? क्या वैसा जिसमें कुछ भी अनापेक्षित (surprise) न हो? क्या वैसा जिसमें अनापेक्षित तो हो पर उसका प्रभाव दूरगामी न हो? मेरा कोई दिन सामान्य होने पर भी इस कसौटी पर खरा नहीं उतरता। मेरा दिन होता है अमूमन, फीका और बेमजा। प्लेन वनीला आइसक्रीम सा लगताContinue reading “एक सामान्य सा दिन”
जीवन एक उत्सव
फलाना जी बड़े कुटिल हैं। उनका दिमाग बड़ा पेचीदा है। यानी कि उनके सिर में एक ओर से कील ठोंको तो दूसरी ओर से पेंच बन कर निकलेगी। कोई भी विचार सरल सरल सा नहीं बह सकता उनके मन में। हर बात में एक्यूट एंगल की सोच। और जो सोचता है वह बुद्धिजीवी होता है।Continue reading “जीवन एक उत्सव”
