हरिकेश प्रसाद सिन्ह मेरे साथ जुड़े इंस्पेक्टर हैं. जो काम मुझे नहीं आता वह मैं एच पी सिन्ह से कराता हूं. बहुत सरल जीव हैं. पत्नी नहीं हैं. अभी कुछ समय पहले आजी गुजरी हैं. घर की समस्याओं से भी परेशान रहते हैं. पर अपनी समस्यायें मुझसे कहते भी नहीं. मैं अंतर्मुखी और वे मुझसेContinue reading “गंगा का कछार, नीलगाय और जट्रोफा”
Author Archives: Gyan Dutt Pandey
एक जंक पोस्ट – फीड एग्रीगेटर को क्या-क्या बताओगे?
पहले लोग खुले में डर्टी लिनेन धोते थे, अब भी धोते हैं. पहले शायद साबुन लगाते हों, अब डिटर्जेण्ट के रूप में फीड एग्रीगेटर का प्रयोग करते हैं. मेल बनाते हैं – हमें हटा दो. पर भेजने से पहले पोस्ट पब्लिश कर फीड एग्रीगेटर को देते हैं (उसी मेल का कण्टेण्ट प्रयोग करते हुये). फलानेContinue reading “एक जंक पोस्ट – फीड एग्रीगेटर को क्या-क्या बताओगे?”
कर्ज लेते हैं पर लौटाते समय कोसते हैं बाजारवाद को!
बाजार है – वह भग्वद्गीता के स्थितप्रज्ञ दर्शन पर नहीं चलता है. वह उपभोक्ता केन्द्रित होता है और पूंजी तथा वस्तुओं के विनिमय को सुविधजनक बनाता है. बैंक बाजार की एक महत्वपूर्ण इकाई है. बैंक वाले रेलवे स्टेशन के हॉकर की तरह चाय-चाय की रट जैसा बोल लोन बाटें तो लोग अच्छा महसूस करते हैं.Continue reading “कर्ज लेते हैं पर लौटाते समय कोसते हैं बाजारवाद को!”
