नारद और हिंदी के हर मर्ज की दवा


मैं अपने एक इंस्पेक्टर को कहा रहा था कि कहीं से दिनकर की उर्वशी खरीद लायें। मेरी प्रति खो गयी है। मेरे एक गाडी नियंत्रक पास में खडे थे। बोले – साहब आपने पिछली बार दिल्ली भेजा था तो कुछ लोग वहां बात कर रहे थे कि आपकी हिंदी के बारे में अगर कोई प्राबलमContinue reading “नारद और हिंदी के हर मर्ज की दवा”

अच्छा मित्रों, राम-राम!


महीना भर हिन्दी में लिखने की साध पूरी कर ली. रूटीन काम के अलावा रात में ट्रेन ऑपरेशन से जुड़ी़ समस्याओं के फोन सुनना; कभी-कभी ट्रेन दुर्घटना के कारण गाडि़यों को रास्ता बदल कर चलाने की कवायद करना; और फिर मजे के लिये दो उंगली से हिन्दी टाइप कर ब्लॉग बनाना – थोडा़ ज्यादा हीContinue reading “अच्छा मित्रों, राम-राम!”

भईया, मन्दिर में राम कैद तो नहीं होंगे.


अभय तिवारी ने बडी़ सुन्दर पोस्ट लिखी भगवान राम पर. लेकिन किसी मजबूरी वश पोस्ट में चलते-चलते लीप-पोत दिया. राम मन्दिर अयोध्या में बनाने में आस्था डगमगा गयी. मंदिर में राम बंधक नजर आने लगे. यह मजबूरी बहुतों की है. लोग मुसलमान यार-दोस्तों की यारी एक पत्थर के मंदिर के नाम पर तोड़ना नहीं चाहते.Continue reading “भईया, मन्दिर में राम कैद तो नहीं होंगे.”

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