सवेरे चार बजे नींद खुलने का समय होता है। आमतौर पर नींद एक सुखद अहसास के साथ खुलती है। आज वह एक (दु:) स्वप्न के साथ खुली। भोर के सपने में देखा कि मैं प्लेटफार्म पर खड़ा हूं। ट्रेन लगी है और मुझे यह भी नहीं याद कि किस ट्रेन में किस कोच में मुझेContinue reading “रेल यात्रा का भय”
Author Archives: Gyan Dutt Pandey
सियार
<<< सियार >>> जीटी रोड के किनारे के इस गांव में बसे एक दशक होने को आया और मैं गांव की पहचान के तत्वों को ढहते देखता रहा हूं। जो तत्व अभी भी कायम हैं, उनमें से एक है – सर्दियों के महीने में शाम होते ही उठती सियार की हुआं हुआं करती आवाजें। मेरेContinue reading “सियार”
कहां कहां दखल देगा एआई?
अमर उजाला में न्यूयॉर्क टाइम्स से कबाड़ा एक लेख है – “एआई का फायदा उठायें, खामियां किसमें नहीं होतीं”। इसमें ईवान रैंटलिफ जी नाम के सज्जन कहते हैं कि टेलीमार्केटिंग में और सामान्य बातचीत में भी; एआई घुस गया है। उनका कहना है कि जो भी उनसे बात करना चाहता है उसके सामने वे इसContinue reading “कहां कहां दखल देगा एआई?”
