कक्षा आठ में जाने का अनुभव मेरे जीवन का एक बहुत खास और यादगार समय था। इसमें मेरे मन में एक साथ कई तरह की भावनाएँ चल रही थीं—डर, खुशी, उत्साह और थोड़ा सा दुख भी। कक्षा शुरू होने से एक दिन पहले रात को मैं बिल्कुल ठीक से सो नहीं पा रही थी। मैं बार-बार यही सोच रही थी कि अब मैं बड़ी हो रही हूँ। यह सोचकर मुझे थोड़ा अजीब भी लग रहा था, क्योंकि मुझे लग रहा था कि सब कुछ बहुत जल्दी बदल रहा है।
मेरे मन में यह भी चल रहा था कि अब नया सेक्शन होगा, नए बच्चे होंगे और सब कुछ नया होगा। मुझे यह सोचकर अच्छा भी लग रहा था कि मैं नए लोगों से मिलूँगी, लेकिन साथ ही यह दुख भी था कि मेरे कुछ पुराने दोस्त अब मेरे साथ नहीं होंगे। मेरी एक बहुत अच्छी दोस्त त्रिशा दूसरे सेक्शन में चली गई थी, और यह बात मुझे अंदर से थोड़ा उदास कर रही थी।
जब मैंने अपनी नई किताबें देखीं, तो मेरे मन में और भी ज्यादा भावनाएँ आ गईं। सोशल साइंस (SST) की किताब मुझे बहुत अच्छी लगी। उसके चैप्टर्स देखकर मुझे लगा कि इसे पढ़ने में मज़ा आएगा और मैं बहुत कुछ नया सीखूँगी। लेकिन जैसे ही मैंने मैथमैटिक्स की किताब देखी, मैं थोड़ा डर गई। उसमें इतने सारे सम और इक्वेशंस थे कि मुझे लगा कि यह सब मेरे लिए बहुत कठिन होगा। उस समय मैं किताबों को देखकर थोड़ी घबराई भी और थोड़ा उत्साहित भी हुई।
अगले दिन जब मैं स्कूल पहुँची और अपनी नई कक्षा में गई, तो मेरा दिल तेज़ धड़क रहा था। क्लास में नए चेहरे थे और माहौल भी अलग लग रहा था। तभी हमारी क्लास टीचर, सरिता मिश्रा मैम क्लास में आईं। उनके चेहरे पर एक बड़ी सी मुस्कान थी, और जैसे ही उन्होंने हमें देखा, उन्होंने बहुत ही प्यार और अपनापन के साथ हमारा स्वागत किया। उस पल क्लास का माहौल एकदम बदल गया।

मैम का स्वभाव बहुत अलग था। वह एक तरफ सख्त थीं, तो दूसरी तरफ बहुत ही दयालु भी थीं। जैसे ही क्लास शुरू हुई, उन्होंने देखा कि एक बच्चे ने इमोजी बैज नहीं पहना था। हमारे स्कूल में इमोजी बैज पहनना जरूरी होता है, क्योंकि इससे हम अपने भाव दिखाते हैं। हमारे पास चार तरह के इमोजी बैज होते हैं—happy, tired, angry, sad ( 😀🥱😡☹️) —और हम उस दिन जैसा महसूस करते हैं, वैसा बैज पहनते हैं।
उस बच्चे ने बैज नहीं पहना था, तो मैम ने उसे थोड़ी सख्ती से डांटा। उस समय उनकी आवाज़ में अनुशासन साफ दिखाई दे रहा था और पूरी क्लास एकदम शांत हो गई। लेकिन उसी के बाद उन्होंने उसे प्यार से समझाया कि यह सिर्फ एक नियम नहीं है, बल्कि अपने मन की बात बताने का एक तरीका है। उनके इस व्यवहार से हमें समझ आया कि वह हमें सिर्फ डांटती नहीं हैं, बल्कि हमें सही रास्ता भी दिखाती हैं।
फिर मैम ने हम सब से बात की। उन्होंने बहुत ही सच्चे और शांत तरीके से कहा कि “यह क्लास सिर्फ पढ़ाई की जगह नहीं है, यह हमारा एक परिवार है।” उन्होंने कहा कि पूरे साल हम एक परिवार की तरह रहेंगे—कभी हम हँसेंगे, कभी छोटे-मोटे झगड़े भी होंगे, लेकिन हम हमेशा एक-दूसरे का साथ देंगे।
उस दिन के बाद मैंने महसूस किया कि कक्षा आठ सिर्फ कठिन पढ़ाई नहीं है, बल्कि यह एक नई शुरुआत है। अब मुझे धीरे-धीरे अपनी किताबों से उतना डर नहीं लगता। सोशल साइंस मुझे अब भी बहुत पसंद है, और मैथ से थोड़ा डर अभी भी है, लेकिन अब मैं कोशिश करती हूँ कि उसे समझ सकूँ।
उन्होंने अपना अनुभव भी साझा किया। उन्होंने बताया कि जब वह खुद कक्षा आठ में थीं, तब उन्हें समझाने वाला कोई खास नहीं था। उन्हें भी डर लगता था और वह भी हमारी तरह घबराई हुई थीं। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि आज हमारे पास बहुत कुछ है—अच्छे शिक्षक, किताबें और मदद करने वाले लोग—इसलिए हमें डरने की जरूरत नहीं है, बल्कि खुश होना चाहिए कि हमें इतना कुछ सीखने का मौका मिल रहा है।
मैम की बातों में सख्ती भी थी और अपनापन भी। कभी-कभी उनकी सख्ती देखकर थोड़ा डर लगता था, लेकिन उनकी बातों में जो सच्चाई और देखभाल थी, वह साफ महसूस होती थी। उनके स्वभाव मेरे मन में एक अलग ही भावना बनने लगी— उनकी सख्ती अजीब लगती थी, तो उनका प्यार बहुत अच्छा लगता था।
इस पूरे अनुभव ने मुझे यह सिखाया कि हर नई शुरुआत में थोड़ा डर होना सामान्य है, लेकिन अगर हमें सही शिक्षक मिल जाएँ, तो वही डर धीरे-धीरे खत्म हो जाता है।
कक्षा आठ की शुरुआत मेरे लिए सिर्फ एक बदलाव नहीं थी, बल्कि एक सीख थी, जिसने मुझे थोड़ा और मजबूत बना दिया।
