गंगा का कछार, नीलगाय और जट्रोफा


हरिकेश प्रसाद सिन्ह मेरे साथ जुड़े इंस्पेक्टर हैं. जो काम मुझे नहीं आता वह मैं एच पी सिन्ह से कराता हूं. बहुत सरल जीव हैं. पत्नी नहीं हैं. अभी कुछ समय पहले आजी गुजरी हैं. घर की समस्याओं से भी परेशान रहते हैं. पर अपनी समस्यायें मुझसे कहते भी नहीं. मैं अंतर्मुखी और वे मुझसेContinue reading “गंगा का कछार, नीलगाय और जट्रोफा”

‘भैया किराया-भाड़ा बढ़ाते क्यों नहीं?’


अमुक हमारा कम्पिटीटर है. बस चलाता है. बनारस-इलाहाबाद से नागपुर. हमारा कम्पिटीटर यानी रेलवे का कम्पीटीटर. ट्रेन में जगह न मिले तो बनारस स्टेशन से उसके चेले यात्री को उसकी बस में बिठाने ले आते हैं. उसे एक ही कष्ट है कि रेलवे किराया क्यों नहीं बढ़ाती. किराया बढ़ाये तो वह भी अपनी बस काContinue reading “‘भैया किराया-भाड़ा बढ़ाते क्यों नहीं?’”

बार-बार देखो; हजार बार देखो!


मेरे एक मित्र हैं. सारी टिप्स लेने और सारी गणना करने के बाद एक शेयर खरीदते है. फिर पांच मिनट बाद उसकी वैल्यू चेक करते हैं. अगर पांच पैसे बढ़ गयी तो दस लोगों को बताते हैं कि उनकी स्टॉक रिसर्च कितनी जबरदस्त है. उनका सेंस आफ टाइम कितना एक्यूरेट है. ये जितने ब्लॉगर हैं,Continue reading “बार-बार देखो; हजार बार देखो!”

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