गांवदेहात डायरी बरियापुर के शांतिधाम से निकलता हूं साइकिल ले कर तो दो विकल्प होते हैं—गंगाकिनारे पंडा जी के पास जा कर निरहू की चाय की गुमटी पर चाय पी लूं, या फिर साइकिल को रेल लाइन की ओर मोड़ दूं और उस पार के गांवों को तब तक नापूं जब तक लौटने का वक़्तContinue reading “साइकिल और गौरैया”
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हरामी कोई गाली है?
गांवदेहात डायरी साइकिल से देखा गांव सुबह की हल्की धूप बरियापुर पर पड़ रही है।जीवन लाल, तीस-बत्तीस साल का दुबला-पतला नौजवान, खादी जैसी कमीज़ और गले में काला बैग टाँगे साइकिल पर बैठता है। बैग में फाइलें, एक रजिस्टर, कैलकुलेटर और अब तो एक स्मार्टफोन भी—जिससे वह कैशपोर के माइक्रोफिनांस ग्रुप की उपस्थिति और कलेक्शनContinue reading “हरामी कोई गाली है?”
गांवदेहात का जेम्स हैरियेट
आज फिर दांतों का फॉलोअप था डाक्टर स्वमित्र के क्लीनिक में। फिर कई रेडियोग्राफिक शूट। फिर थोड़ी दांतों की घिसाई। फिर दांतों के रूट्स तक फाइल चुभाने की फाइन ट्यूनिंग। मैं कुर्सी पर आधा लेटा था। मुंह खुला। भीतर धातु के औज़ारों की खनखनाहट। बोल नहीं सकता था, पर सुन सब रहा था। इसी बीचContinue reading “गांवदेहात का जेम्स हैरियेट”
