रामकृष्ण परमहंस के पैराबल्स (parables – दृष्टान्त) में एक प्रसंग है। एक नारी अपने पति से कहती है – “उसका भाई बहुत बड़ा साधक है। वर्षों से वैराग्य लेने की साधना कर रहा है।” पति कहता है – “उसकी साधना व्यर्थ है। वैरग्य वैसे नहीं लिया जाता।” पत्नी को अपने भाई के विषय में इसContinue reading “वैराग्य को कौन ट्रिगर करता है?”
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अपने अपने इन्द्रप्रस्थ
जिप्सियाना स्वभाव को ले कर जब मैने पोस्ट लिखी तो बरबस पॉउलो कोएल्हो की पुस्तक द अलकेमिस्ट की याद हो आयी। (अगर आपने पुस्तक न पढ़ी हो तो लिंक से अंग्रेजी में पुस्तक सार पढ़ें।) उसका भी नायक गड़रिया है। घुमन्तु। अपने स्वप्न को खोजता हुआ मिश्र के पिरामिड तक की यात्रा करता है। वहContinue reading “अपने अपने इन्द्रप्रस्थ”
इस्लामिक एपॉस्टसी की अवधारणायें
कुछ दिन पहले तेजी बच्चन जी के निधन का समाचार मिला। इसको याद कर मुझे इण्टरनेट पर किसी जवाहरा सैदुल्ला के इलाहाबाद के संस्मरणों वाला एक लेख स्मरण हो आया; जिसमें तेजी बच्चन, फिराक गोरखपुरी, अमिताभ के जन्मदिन पर दी गयी पार्टी आदि का जिक्र था। उसे मैने कई महीने पहले पढ़ा था। इण्टरनेट परContinue reading “इस्लामिक एपॉस्टसी की अवधारणायें”
