तुर्री – कमोडानुशासन से बिडेटानुभव तक


बचपन से शुरू करता हूं। सन 1958 रहा होगा। तीन साल का ज्ञानदत्त। खेलते कूदते अचानक दबाव बना तो दौड़ लगाई घर के सामने के दूसरे खेत में। नेकर का नाड़ा नहीं खुला तो पेट सिकोड़ कर किसी तरह उसे नीचे किया। निपटान में एक मिनट लगा होगा बमुश्किल। पानी की बोतल का प्रचलन नहींContinue reading “तुर्री – कमोडानुशासन से बिडेटानुभव तक”

बढ़ती उम्र, साइकिल और नई पीढ़ी


दो दिन से राजन भाई मेरे घर आ रहे हैं। दस साल पहले वे मुझे साइकिल के जोड़ीदार बन कर यहां गांवदेहात का करीब 10 वर्ग किलोमीटर का एरिया दिखाने वाले थे। एक एक चप्पा चप्पा – नदी, ताल, खेत और लोग हमने देखे। पर कालांतर में उनका साइकिल चलाना और मेरे घर पर आनाContinue reading “बढ़ती उम्र, साइकिल और नई पीढ़ी”

बंडी नुमा गंजी (बनियान)


घर परिसर में साइकिल चलाते समय गूगल फिट पर साइकिल अभ्यास का डाटा सृजित करना और साथ ही कोई पुस्तक या पॉडकास्ट सुनते रहना थोड़ा नियोजन मांगता है। गले में एक ब्ल्यूटूथ वाला नेकबैंड और पॉकेट में मोबाइल चाहिये। घर में सूटेड बूटेड रहना बेकार है। अपनी मेज पर बैठे जब मन ऊबे तो साइकिलContinue reading “बंडी नुमा गंजी (बनियान)”

Design a site like this with WordPress.com
Get started