विश्वनाथ बिंद


तीन लड़के हैं विश्वनाथ के। अलग अलग हो गये हैं। यहीं पास पास तीनो ने घर बनाये हैं। सबसे छोटे कट्टू के यहां रहता है विश्वनाथ। एक कमरे का घर है कट्टू का और उसके टीन के ओसारे में विश्वनाथ का तख्त बिछा है। बारहों महीने मैं विश्वनाथ को उसी तख्त पर रहते पाता हूं।Continue reading “विश्वनाथ बिंद”

दस हजार कदम से ज्यादा चलना


*** दस हजार कदम से ज्यादा चलना *** जब 2015 के उत्तरार्ध में रिटायर हुआ था तो मैं पैदल नहीं चल पाता था। सौ दो सौ कदम चलने पर घुटनों में दर्द होने लगता था। रेलवे के हमारे डाक्टर साहब ने मुझे सलाह दी थी कि पैदल चलने की बजाय साइकिल चलाऊं। जितनी देर पैदलContinue reading “दस हजार कदम से ज्यादा चलना”

टहनियों की छंटाई


*** टहनियों की छंटाई *** सुग्गी के लड़के हैं – गोविंद और राजा। गोविंद बीस-इक्कीस का होगा और राजा उससे दो-तीन साल छोटा। दोनो ने मिल कर मेरे घर के सागौन और पलाश के उन टहनियों को छांटा जो सूरज की रोशनी रोकती थीं। मौसम बदलने की अपनी जरूरते हैं। गर्मी में हमें छाया चाहिये।Continue reading “टहनियों की छंटाई”

Design a site like this with WordPress.com
Get started