महिषासुर


काफी समय हुआ जब देखा था कि विसर्जित देवी प्रतिमा का एक अंश गंगा नदी के किनारे पड़ा था। विसर्जन में यह धारा में बह नहीं पाया था। और घाट पर मारा मारा फिर रहा था। अनुमान था कि इसका उपयोग जवाहिरलाल कभी न अभी अलाव जलाने में कर लेगा। पर वैसा हुआ नहीं। कछारContinue reading “महिषासुर”

ममफोर्डगंज में पीपल का पेड़ और हाथी


यहाँ ममफोर्डगंज में पीपल के पेड़ के नीचे एक हाथी रहता था। चुनाव की घोषणा होने के बाद उसे नहीं देखा मैने। सोचा, शायद बहुजन समाज पार्टी के प्रचार में लग गया होगा। अन्यथा दफ्तर जाते हुये उसे पीपल के पेड़ के नीचे देखा करता था। एक पैर लोहे के जंजीर से बंधा रहता था।Continue reading “ममफोर्डगंज में पीपल का पेड़ और हाथी”

हज़रत लाइन शाह बाबा का फकीर


यह शहर का अंत है। शहर का उत्तरी-पूर्वी किनारा। लाइन शाह बाबा की मजार इलाहाबाद के मध्य में है – इलाहाबाद स्टेशन पर। शिवकुटी वहां से लगभग 15-18 किलोमीटर दूर है। वैसे भी यह स्थान शैव मन्दिरों और गंगा के तट के कारण है। किसी इस्लामी या सूफी सम्प्रदाय के स्थान के कारण नहीं। परContinue reading “हज़रत लाइन शाह बाबा का फकीर”

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