बौद्ध विहार में दान के उपयोग के बारे में बहुत पहले पढ़ा था – दान में मिले कम्बल पहले ओढ़ने, फिर बिछाने, फिर वातायन पर परदे … अंतत: फर्श पर पोछा लगाने के लिये काम आते थे। कोई भी कपड़ा अपनी अंतिम उपयोगिता तक उपयोग किया जाता था। मुझे लगा कि कितने मितव्ययी थे बौद्धContinue reading “कथरी”
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सुन्दरकाण्ड पाठ
हनूमान जी के मन्दिर में हर मंगलवार को छात्र जुटते हैं और सुन्दरकाण्ड का पाठ करते हैं। शाम छ-सात बजे के बीच यह आयोजन होता है। लगभग एक दर्जन विद्यार्थी होते हैं। एक डेढ़ घण्टे में, पूरी लय में सुमधुर स्वर में यह पाठ होता है। बहुत समय से चलता आया है। पाठ करने वालेContinue reading “सुन्दरकाण्ड पाठ”
पण्डा जी
पण्डाजी हैं स्वराज कुमार पाण्डेय। उनके स्वसुर जी की गद्दी थी शिवकुटी के पण्डा की। स्वसुर जी के लड़का नहीं था, अत: स्वराज कुमार जी को गद्दी मिली दहेज में! पहले पण्डाजी लाइटिंग-साउण्ड आदि का काम कराते थे। शादी व्याह, फंक्शन आदि में ठेकेदारी। उनको मशीनें ठीक करना आता है। मेरा भृत्य ऋषि कुमार बताताContinue reading “पण्डा जी”
