मड़ई माने सरपत की टटरी लगा कर बनाई गई झोंपड़ी। बहुत सी हैं यहां शिवकुटी के गंगा किनारे। खेती करने वाले लोग इनका प्रयोग करते हैं। इनके चित्र से प्रेरित हो मैने फेसबुक पर अपना प्रोफाइल चित्र ही मड़ई का कर लिया है। मेरे यहां मुख्य वाणिज्य प्रबन्धक (यात्रिक सेवायें) सुश्री गौरी सक्सेना ने तोContinue reading “मड़ई”
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मन्नत-ए-हीरालाल
डेढ़ साल पहले हीरालाल पर रिपोर्ट थी – हीरालाल की नारियल साधना। उसमें है कि हीरालाल ने केश बढ़ा रखे थे और दाढ़ी भी रखी थी किसी मन्नत के चलते। उस समय हीरालाल ने बताया था कि वह मनौती पूरी होने वाली थी। देश के इस इलाके में मन्नत मानने का चलन है। दक्खिन मेंContinue reading “मन्नत-ए-हीरालाल”
प्री-मानसूनस्य प्रथमे प्राते:
प्री-मानसून के प्रथम प्रात: में कालिदास को याद करता हूं। मोहन राकेश को भी याद करता हूं। क्यों? ब्लॉग़ पर कारण बताने की बाध्यता नहीं है। वैसे भी यह साहित्यिक ब्लॉग नहीं है। कल शाम आंधी आई और ओले पड़े। जिसके गांव में बंटाई पर खेती दे रखी गई है, वह तुरंत फोन लगा करContinue reading “प्री-मानसूनस्य प्रथमे प्राते:”
