कुनबी का खेत, मचान और करेला


वह अनुभव ज्यादा महत्वपूर्ण था – पूरी तरह एड-हॉक तरीके से गांव की सड़क पर चलते चले जाना। किसी कुनबी के खेत में यूंही हिल जाना। मचान से सोते किसान को उठाना और पपीता खरीदने की मंशा रखते हुये करेला खरीद लेना।

कुछ बच्चों के पुराने चित्र


कुल मिला कर लड़कियों की जिंदगी ढर्रे पर चल निकली है। वे घर संभालने लगी हैं। खेतों में कटाई के काम में जाने लगी हैं। लड़के अभी बगड्डा घूम रहे हैं, पर कुछ ही साल बाद मजदूरी, बेलदारी, मिस्त्रियाना काम में लग जायेंगे।

गोविंद लॉकडाउन में बम्बई से लौट तीन बीघा मेंं टमाटर उगा रहे हैं


वे लॉकडाउन के समय बंबई से अपने घर वापस लौटे थे। वहां ऑटो चलाते थे। यहां समझ नहीं आया कि क्या किया जाये। फिर यह सब्जी उगाने की सोची।