चोरल के जंगल में बघेरे तो बहुत हैं। हर दूसरे तीसरे दिन खबर आती है कि आसपास के गांवों में किसी की गाय मार गया या किसी की बकरी उठा ले गया। … लोग भी हैं, गांव भी हैं, पालतू जानवर भी हैं और बघेरे भी। सब सामान्य चलता है।
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एक दिन में उज्जैन से इंदौर, पैदल 60 किमी चलना हुआ
महाकाल आरती के समय डमरू बजाने वाले – जीतू, शुभम और लकी – प्रेमसागर से मिलना चाहते थे। पर जब पता चला कि वे इंदौर के लिये निकल चुके हैं तो वे लोग पीछे दुपहिया वाहन पर आये और रास्ते में प्रेमसागर से मिले।
देवास से उज्जैन और उज्जैन में
पहले प्रतीक्षा में एक घण्टा बैठना पड़ा। फिर चार से पांच बजे के बीच महाकाल का सिंगार हुआ और उसके बाद एक घण्टा भस्म आरती। श्मसान की भस्म की आरती। छ बजे बाहर निकल कर उन्होने अपनी एक सेल्फी ली; यादगार के रूप में।
