गांवदेहात डायरी करीब साल भर बाद लसमणा और बनवारीपुर की संधि से गुजर रहा था। दांई ओर एक भव्य मंदिर बनता दिखा तो मेरी साइकिल अपने आप रुक गई। मंदिर के पास एक आदमी अपने तीन जर्मन शेफर्ड कुत्तों के साथ टहल रहे थे। बनियान और लुंगी में। तीनों कुत्ते बिना लीश के। मैंने सोचा,Continue reading “लसमणा के दुबे बंधु”
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करिया पासी की नेगेटिविटी
गांवदेहात डायरी मैंने शायद ही कभी करिया पासी को प्रसन्न देखा हो। सर्दी, गर्मी, बरसात—सबमें वह समभाव से नेगेटिव ही रहता है। मेहनती है, पर दऊ (भगवान) को हमेशा कोसता पाया जाता है। आज वह खेत के किनारे मिला। सरसों और गेंहू की फसल अच्छी लग रही थी। लगा कि आज तो खुश होना चाहियेContinue reading “करिया पासी की नेगेटिविटी”
सुनील भाई ओझा के बाद गड़ौलीधाम
गांवदेहात डायरी सुनील ओझा जी का निधन 29 नवम्बर 2023 को हुआ। उसके बाद से मेरा गड़ौलीधाम जाना नहीं हुआ। गड़ौलीधाम सुनील भाई का ड्रीम-प्रॉजेक्ट था। इसके जरिये वे गांवदेहात की सूरत बदलने की सोचते थे। यहां एक गौशाला होती, एक चिकित्सालय, एक शिव मंदिर। आसपास के वृद्धों को भोजन उपलब्ध कराने की व्यवस्था। मैंContinue reading “सुनील भाई ओझा के बाद गड़ौलीधाम “
