मोबाइल नहीं, डिजिटल कल्पवास चाहिए


मोबाइल को जीवन में रस और जीवन के बड़े अर्थ से जोड़ने का उपक्रम सुबह साइकिल लेकर निकलता हूँ। घरपरिसर में ही गोल गोल चक्कर।  साइकिल बहुत तेज नहीं चलाता—इतनी ही कि शरीर चलता रहे और मन को पीछे छूट जाने का डर न हो। कान में किसी किताब की summary चलती है, लेकिन 1XContinue reading “मोबाइल नहीं, डिजिटल कल्पवास चाहिए”

Create your own website, free on WordPress.com.Create your own website.
Start free