महामृत्युंजय पाठ का भंडारा – अगियाबीर की एक शाम


कल प्रेमनारायण मिश्र जी रात पौने नौ बजे आये। वे चित्रकूट धाम से लौट रहे थे और आज होने वाले भंडारे का निमंत्रण देने आये थे। रात का समय, यात्रा की थकान, और उसके बावजूद उनका आग्रह—इससे ही आयोजन का भाव समझ में आ रहा था। प्रेमनारायण जी के यहां सात दिवसीय महामृत्युंजय मंत्र-जाप हुआContinue reading “महामृत्युंजय पाठ का भंडारा – अगियाबीर की एक शाम”

पूरन वर्मा की झंझरी


 < गांवदेहात डायरी > तापक्रम चालीस डिग्री छूने लगा है। अब मिट्टी का मटका लेने का समय आ गया है। बाबू सराय में अमूल दूध वाले महेंद्र सिन्ह जी से पूछा—“आसपास कहीं मटकी की दुकान है? टोंटी लगी मटकी वाली?” उन्होंने बताया—“आगे करीब दो सौ मीटर पर एक दुकान है, अच्छी-अच्छी मिट्टी की चीजें मिलतीContinue reading “पूरन वर्मा की झंझरी”

होरमुज़ बंदी और रसोई के कार्बन फुटप्रिंट 


गांवदेहात डायरी युद्धों का असली प्रभाव विभीषिकाओं और त्रासदियों में नहीं, लोगों की आदतों में होने वाले परिवर्तन में दिखाई देता है। फारस की खाड़ी और होरमुज़ जलडमरूमध्य मेरे गांव से लगभग 2600 किलोमीटर दूर है। वहां क्या हो रहा है—इससे गांव वालों को सीधा कोई लेना-देना नहीं। पर उसका असर यहां तक पहुंचा है।Continue reading “होरमुज़ बंदी और रसोई के कार्बन फुटप्रिंट “

Create your own website, free on WordPress.com.Create your own website.
Start free