मैं प्रेमसागर से तालमेल नहीं बिठा पाया। उन्होने अपनी कांवर यात्रा का ‘लास्ट-पुश’ जोर से दिया। कल सवेरे तीन बजे निकल लिये फाटा से। सवेरे साढ़े आठ बजे उनका फोन सोनप्रयाग से आया। बाजार की चहल पहल के शोर के बैकग्राउण्ड में वे एक लाठी खरीद रहे थे – “भईया, अब यहां छड़ी और रेनकोट के बिना काम नहीं चलेगा। रेनकोट का इंतजाम कर लिया है। छड़ी खरीद कर आगे बढ़ूंगा। आज केदार दर्शन करने का कोशिश है। इसलिये सवेरे तीन बजे निकल लिया हूं। देर भी होगी, तो भी आज केदारनाथ पंहुच ही जाऊंगा।”

फाटा से केदार 40 किमी दूर है। खड़ी चढ़ाई के बीच पैदल यात्रा चालीस किलोमीटर की; वह भी जिंदगी में पहली बार – मुझे लगा कि ज्यादा ही अटेम्प्ट कर रहे हैं प्रेमसागर। पर उनके कहे के बीच मुझे किंतु-परंतु कहने का अवसर नहीं था। नेटवर्क बहुत अच्छा नहीं था। बात बमुश्किल हो रही थी। उनके भेजे चित्र और उनकी लाइव लोकेशन तो मुझे मिल ही नहीं पाये। दिन में कहां कैसे यात्रा हुई, पता नहीं। शाम सात बजे उनका फोन आया पर कोई आवाज नहीं थी। मैंने दो सिम बदल बदल कर बात करने की कोशिश की पर एक भी शब्द नहीं आया-गया। ह्वाट्सएप्प पर ऑडियो कॉल तो लगी नहीं। इण्टरनेट काफी कमजोर था। … सो पता नहीं चला कि प्रेमसागर कहां से बात कर रहे थे।

असल में वे केदारनाथ दर्शन कर चुके थे। उसके बाद मुझे फोन कर सूचित करने का प्रयास कर रहे थे। पर फोन लगा नहीं।
आज मैंने सवेरे पांच बजे उन्हें रिंग किया। वे सोनप्रयाग में थे। बताया – “भईया कल शाम दर्शन हो गये। बाहर आ कर आपको फोन किया था, पर बात नहीं हुई। प्रवीण भईया, सुधीर भईया को भी फोन किया था, पर फोन लगा नहीं। दर्शन के बाद वहां से लौट कर रात में ही आज दो बजे सोनप्रयाग पंहुचा। साथ में दस पंद्रह दर्शन कर लौटने वाले लोग थे। यहां सरदारों की ओर से लंगर चल रहा है। उसी में भोजन किया। फिर आपस में बातचीत होती रही। अब नींद से आंख भारी हो रही है। पर फाटा लौट कर वहां दिन भर सोऊंगा।”

गजब आदमी! कल दिन भर चलता रहा। चालीस किलोमीटर चल कर फाटा से केदारनाथ दर्शन किये। फिर लौट कर चालीस किमी पैदल चल कर वापस फाटा पंहुचेगा (अपडेट – साढ़े नौ बजे फाटा पंहुच गये प्रेमसागर फाटा में, जहां उन्होने लॉज में अपना सामान रखा हुआ है)! अस्सी किलोमीटर की पहाड़ की पैदल यात्रा तीस घण्टे में। उस बीच केदारनाथ के ‘वंस-इन-लाइफटाइम’ वाले दर्शन। प्रेमसागर ने अपनी क्षमता की असीमता का सशक्त सिगनेचर प्रस्तुत कर दिया! हर हर महादेव!
पिछले तीन दिन की तरतीबवार यात्रा कर विवरण तो अलग से, प्रेमसागर से और इनपुट्स लेने के बाद प्रस्तुत करूंगा; फिलहाल यह बता रहा हूं, कि द्वादश ज्योतिर्लिंग कांवर यात्रा का इग्यारहवां ज्योतिर्लिंग दर्शन सम्पन्न हो गया है। बारहवां ज्योतिर्लिंग – बाबा बैजनाथ धाम – तो प्रेमसागर का अपना ‘घर’ है। जहां वे 100 से अधिक बार कांवर यात्रा कर चुके हैं। कई बाद दण्ड – दण्डवत करते हुये भी – यात्रा की है वहां की। सो एक प्रकार से कहा जा सकता है कि अपना संकल्प प्रेमसागर ने केदार दर्शन कर पूरा कर लिया है! जय हो!
| *** द्वादश ज्योतिर्लिंग कांवर पदयात्रा पोस्टों की सूची *** पोस्टों की क्रम बद्ध सूची इस पेज पर दी गयी है। |
अब प्रेमसागर को बदरीनाथ जाना है। वह पैदल यात्रा होगी या वाहन से – मुझे मालुम नहीं। उनके नियमानुसार तो अब वाहन से वह यात्रा कर सकते हैं – जितना उपलब्ध हो। उसके बाद वाराणसी वाहन के प्रयोग से आकर, वाराणसी से सुल्तानगंज-देवघर की कांवर यात्रा करनी होगी उन्हें। पर वह सब बाद के लिये।
फिलहाल तो यह सूचना कि, प्रेमसागर का केदार दर्शन सम्पन्न हुआ।

जय बाबा केदारनाथ। हर हर महादेव!













